असाध्य रोगों से पीड़ित गरीबों के इलाज के लिए एसएन मेडिकल कालेज को शासन से मिले बजट में ‘खेल’ कर दिया गया। वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीने में 50 लाख के बजट की 60 फीसदी धनराशि खर्च दर्शाई गई। इसका खुलासा तब हुआ जब पात्र मरीजों को लौटाया जाने लगा। मार्च के शुरुआत में इलाहाबाद की ऑडिट टीम को एसएन प्रशासन की ओर से करीब 30 लाख रुपये ही खर्च होना ही बताया गया था। आंकड़े बताते हैं कि गरीबाें के बजट में से सरकारी कर्मचारियाें का भी इलाज किया गया है। मामले की ठीक ढंग से जांच हो तो लाभ लेने वाले अपात्रों की संख्या और बढ़ सकती है।
गंभीर बीमारियाें से किसी गरीब की मौत न हो इसके लिए प्रदेश सरकार ने 50 लाख का बजट दिया है। इसमें कैंसर, किडनी, हार्ट रोग का इलाज मुफ्त होना है। 35 हजार रुपये से कम वार्षिक आय, साढ़े तीन एकड़ से कम जोत और बीपीएल कार्डधारक मरीज ही पात्र हैं। मरीज की माली हालत देखकर चिकित्सक भी मुफ्त इलाज की संस्तुति कर सकते हैं। वित्तीय वर्ष के शुरुआती 10 महीने में असाध्य रोग के बजट से महज 90 मरीजों का ही इलाज हो सका। फरवरी-मार्च में यह संख्या एकाएक बढ़कर 280 पहुंचती है। इस तरह इन दो महीने में 190 मरीज मरीजों के बिल लगाए गए हैं। चिकित्सकाें की संस्तुति पर इन्हीं दो महीनो में पीपी की संख्या (पुअर पेशेंट) 45 है। साफ है कि मार्च के महीने में गरीबाें को आए असाध्य रोग के बजट को ठिकाने लगा दिया गया।
खर्च का विवरण तलब होगा
एसआईसी डा. हिमांशु यादव ने बताया कि असाध्य रोग बजट में कितने रुपये बचे हैं या फिर खत्म हो गए, इसकी जानकारी की जाएगी। गड़बड़ी मिली तो जांच होगी। दवा और मरीजों का विवरण तलब किया जाएगा।
सरकारी मरीज भी हुए लाभान्वित
असाध्य रोग बजट में 280 मरीजों में से 245 कैंसर, 21 किडनी और पांच मरीज हार्ट संबंधी बीमारी के रहे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गरीबाें के बजट में से नौ सरकारी कर्मचारियाें का भी इलाज किया गया है।
पिछली बार महज तीन लाख ही खर्च
2013-14 वित्तीय वर्ष में एसएन मेडिकल कालेज को 50 लाख का बजट मिला था। इसमें महज तीन लाख रुपये ही खर्च किए जा सके। इस वित्तीय वर्ष (2014-15) में फिर से शासन की ओर से इतनी ही रकम मिली।