आगरा। पुलिस मुठभेड़ में चोरी और लूट के आरोपी पकड़े जा रहे हैं। उनसे तमंचे, राइफल और कारतूस बरामद हो रहे हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि बरामद तमंचे-राइफल या तो राजस्थान के हैं या फिर मध्य प्रदेश में बनाए गए हैं। तस्कर 5000 से 20 हजार तक में इसे उपलब्ध करा रहे हैं। पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक धारा 3/25 आर्म्स एक्ट में 260 प्राथमिकी दर्ज हुईं। इनमें 350 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उनसे 262 तमंचे, 9 रिवाॅल्वर और 41 राइफल बरामद की गईं। आरोपियों से 582 कारतूस भी मिले। धारा 4/25 में 6 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें 6 आरोपी पकड़े गए। उनसे 6 चाकू बरामद हुए।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि जो आरोपी इन हथियारों के साथ पकड़े जा रहे हैं, उनसे कई जानकारी हाथ लगी है। पता चला है कि आगरा से राजस्थान और मध्य प्रदेश के जिलों की सीमा लगी हैं। तीनों राज्यों की सीमा वाले गांवों में अवैध हथियार बनाने वाले सक्रिय रहते हैं। हथियार बनाने के बाद आगरा में लाकर बेचा जा रहा है। इन आरोपियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाती रही है।
5000 से 20 हजार तक में बिक्री
पुलिस ने बताया कि तस्कर अवैध हथियारों को लेकर आते हैं। अपराधी इनको खरीद लेते हैं। एक तमंचे की बिक्री 5000 से 10 हजार रुपये तक में करते हैं। वहीं रिवाॅल्वर और राइफल की बिक्री 10 हजार से 20 हजार तक में की जाती है। हथियारों का इस्तेमाल लोगों से लूट और चोरी की घटना करने में किया जाता है।
सवाल : कहां से आ रहे कारतूस
जिन आरोपियों को पुलिस ने अवैध हथियारों के साथ पकड़ा, उनसे 582 कारतूस भी बरामद किए गए। यह कारतूस कहां से आए? यह पुलिस भी पता नहीं कर सकी है। पुलिस की मानें तो तमंचा, राइफल और रिवाल्वर अवैध तरीके से बनाई जा सकती है। मगर, कारतूस नहीं बनाए जा सकते हैं। इन्हें गन हाउस से ही खरीदा जा सकता है। मगर नियमानुसार, कारतूस की बिक्री लाइसेंस धारक को ही की जा सकती है। गन हाउस संचालक को हर कारतूस का हिसाब रखना होता है। खरीदने वाले भी हिसाब रखते हैं। इसकी जानकारी प्रशासन को दी जाती है। इसके बावजूद अपराधियों के पास कारतूस पहुंच रहे हैं। इस पर पूरे साल कोई कार्रवाई नहीं हुई।