उत्तर प्रदेश के आगरा में स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी को पद से हटा दिया गया है। इन पर छावनी विधायक डॉ जीएस धर्मेश ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लोकायुक्त जांच की मांग की थी। अब इन्हें पद से हटा दिया गया है।
हालांकि हाल ही में जांच के बाद अपर नगर आयुक्त ने आर.के सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्लीन चिट दी थी। इसे विधायक ने पूरी तरह नकार दिया था। कहा था कि वह जल्द ही इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से दोबारा मुलाकात करेंगे। अब इन्हें पद से हटा दिया गया है। इनकी जगह चीफ इंजीनियर बी.एल गुप्ता को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
यह भी पढ़ेंः- श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामला: मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में दिया प्रार्थना-पत्र, कुछ ही घंटों में आ सकता फैसला
भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने निर्माण कार्य व विभिन्न टेंडर प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार होने की बात कही थी। उन्होंने स्मार्ट सिटी के कार्यों में कमीशनखोरी, रिश्वत और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विजिलेंस जांच की मांग की थी।
स्मार्ट सिटी एक प्राइवेट कंपनी है। जिसे शहर में जन सुविधाएं विकसित करने के लिए बीते सात साल में 850 करोड़ रुपये मिले। जन प्रहरी संयोजक नरोत्तम शर्मा का आरोप है कि प्रोजेक्ट के नाम पर ठेकेदार और अधिकारियों ने सरकारी धन का बंदरबांट किया है। कार्यों की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
यह भी पढ़ेंः- Agra News: पर्यटकों में सिर्फ ताज का क्रेज, किला देखने आधे पर्यटक भी नहीं पहुंचते, आठ स्मारकों पर लगता है टिकट
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में 50 से अधिक चौराहों व प्रमुख मार्गों पर करीब 1500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। 282 करोड़ रुपये से नगर निगम में कमांड कंट्रोल सेंटर बना। सीसीटीवी से शहर में यातायात से लेकर अपराध की निगरानी होनी थी, लेकिन, 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खराब मिले थे।