पुलिस ने 36 घंटे बाद जब शक के आधार पर आरोपी का कमरा खोला तो ड्रम में शव बरामद हो गया। नवरात्र में बालिका की हत्या से हर कोई गम और गुस्से में था। आरोपी को फांसी देने की मांग तक की जाने लगी। वह मंगलवार दोपहर ढाई बजे के बाद लापता हुई थी। ताजगंज पुलिस के साथ परिजन भी तलाश में लगे थे। शव बुधवार रात 11:30 बजे कारखाना संचालक के मकान की पहली मंजिल पर किराएदार सुनील के कमरे में बरामद हुआ।
गुस्साए लोगों ने फतेहाबाद रोड पर जाम लगाया। ईंट-पत्थर भी फेंके, पुलिस ने किसी तरह मामला संभाला। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। शव बरामद होने पर हत्या में बदल दी गई। परिजन के बयान के आधार पर प्राथमिकी में आरोपी सुनील के साथ उसके पिता गरीब दास, मां भगवान देई, भाई मुन्ना और चंद्रभान के नाम बढ़ाए गए हैं। पिता और भाइयों का हत्या में हाथ होने का आरोप लगाया गया।
बृहस्पतिवार सुबह तकरीबन 5 बजे डाॅक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। सात बजे शव को पुलिस परिजन के साथ ताजगंज स्थित श्मशान घाट लेकर पहुंची। परिजन ने बेटी का आखिरी बार चेहरा देखा तो चीत्कार मच गई। सुबह साढ़े आठ बजे अंतिम संस्कार किया गया।