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UP: खामोश लेकिन सबसे घातक...आगरा की 4-पैरा स्पेशल फोर्स, जिसने पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड को किया ढेर

Thu, 31 Jul 2025 07:57 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। ये पराक्रम आगरा की 4 पैरा स्पेशल फोर्स ने दिखाया, तो पूर्व सैनिकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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पहलगाम - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पहलगाम के गुनहगार तीन आतंकियों को ढेर कर आगरा की 4 पैरा स्पेशल फोर्स ने कमाल कर दिया। वह टुकड़ी थी आगरा की मिट्टी में पली-बढ़ी देश की सबसे खामोश लेकिन सबसे घातक यूनिट। यह पहला मौका है जब किसी टुकड़ी का नाम संसद में गूंजा। यह कहना है कर्नल जीएम खान (सेना मेडल वीरता) का, वह पूर्व स्पेशल फोर्स अधिकारी हैं।
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कर्नल खान ने कहा कि पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को लश्कर समर्थित आतंकी संगठन टीआरएफ ने 26 निर्दोष लोगों की नृशंस हत्या कर देश को झकझोर दिया था। देश की सुरक्षा के लिए यह सीधी चुनौती थी। 28 जुलाई को डाचीगाम के घने जंगलों में 4 पैरा के जांबाजों ने तीन आतंकियों हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान शाह, अफगान और जिब्रान को ढेर कर दिया।

छह घंटे के मिशन में कमांडोज ने वैज्ञानिक सटीकता, तकनीकी कुशलता और सामरिक दक्षता का अनुपम उदाहरण पेश किया। उनके इस शाैर्य की संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने सराहना की। यह पल न सिर्फ सैन्य इतिहास में बल्कि लोकतांत्रिक चेतना में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया।

उन्होंने कहा कि 4 पैरा कोई साधारण टुकड़ी नहीं। घात लगाओ और लुप्त हो जाओ इसकी पहचान है। आतंकियों के लिए खौफ और नागरिकों के लिए सुरक्षा का प्रतीक है। यह यूनिट 2001 में स्पेशल फोर्स बनने के बाद से कश्मीर घाटी में आतंकवाद के खिलाफ सबसे भरोसेमंद शक्ति है। आगरा से 4 पैरा का गहरा नाता है। यह वही भूमि है, जहां इस पैराशूट रेजिमेंट का गठन हुआ। 4 पैरा ने 2001 में स्पेशल फोर्स के रूप में नया जन्म लिया। अब भी जवान वार्षिक पैरा जंप और युद्ध प्रशिक्षण के लिए आगरा लौटते हैं। संसद यह सम्मान केवल 4 पैरा का नहीं, बल्कि भारतीय सेना और हर उस नागरिक का है, जो राष्ट्र को सर्वोपरि मानता है।

हर बार दुश्मन को चौंकाने में सक्षम
सेवानिवृत्त कर्नल सीके सिंह ने बताया कि 4 पैरा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राष्ट्र के लिए हम न सिर्फ तैयार हैं बल्कि हर बार दुश्मन को चौंकाने में सक्षम हैं। यह पलटन आज भी उतनी ही घातक और तेज है जैसी हमारे समय में थी।

चुप रहते और जोर से करते हैं वार
सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर राम बहादुर का कहना है कि 4 पैरा स्पेशल फोर्स है। जो चुप रहते हैं, सबसे जोर से वार करते हैं। यही तो हमारी पहचान है। सैनिकों ने पहलगाम में हुई आतंकी घटना का बदला लेकर हमें गर्व से भर दिया। 

यह हमारे खून पर गर्व
सेवानिवृत्त सूबेदार धन बहादुर ने कहा कि हर बार जब 4 पैरा कोई मिशन पूरा करती हैं तो वह सिर्फ सैन्य सफलता नहीं होती। वह हर पूर्व सैनिक के दिल की धड़कन होती है। यह हमारे खून पर गर्व है।
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गर्व है मैंने ऐसी पलटन में सेवा की
सेवानिवृत्त सूबेदार मोटी प्रसाद का कहना है कि ऑपरेशन महादेव न केवल रणनीतिक विजय है बल्कि यह भावनात्मक न्याय भी है। मुझे गर्व है कि मैंने ऐसी पलटन में सेवा की जो चुपचाप इतिहास रच देती है। 
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