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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: जांच के नाम पर धोखा, प्रशासन पर नहीं भरोसा, क्लीन चिट के बाद मृतकों के परिजनों में आक्रोश

Sun, 20 Jun 2021 09:23 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

परिजनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जांच के नाम पर हमारे साथ धोखा हुआ है। अब जिला प्रशासन पर भरोसा नहीं रहा। हम इंसाफ के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ते रहेंगे।
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमघोंटू मॉकड्रिल के मामले में श्री पारस अस्पताल को प्रशासनिक जांच में क्लीन चिट मिलने से मृतक मरीजों के परिजनों में गहरा आक्रोश है। शनिवार को उन्हें तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जांच के  नाम पर हमारे साथ धोखा हुआ है। अब जिला प्रशासन पर भरोसा नहीं रहा। हम इंसाफ के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ते रहेंगे।

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 25 से 27 अप्रैल के बीच ताजनगरी में एक तरफ संक्रमण की लहर चरम पर थी तो दूसरी तरफ कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, वेंटीलेटर व रेमेडिसिविर के लिए हाहाकार मचा था। 26 अप्रैल कोे भगवान टॉकीज स्थित श्री पारस अस्पताल में पांच मिनट की मॉकड्रिल की गई। जिसका वीडियो सात जून को वायरल हुआ। इस वीडियो में अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन 22 गंभीर मरीजों की ऑक्सीजन बंद करने की बात करते दिख रहे हैं।

वीडियो वायरल होने से सूबे में हड़कंप मच गया था। मुख्यमंत्री ने डीएम को जांच के आदेश दिए। दस दिन बाद जांच में प्रशासन ने आरोपित चिकित्सक को अघोषित क्लीन चिट दे दी। शनिवार को श्री पारस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक तरफ जन सामान्य ने प्रशासन के खिलाफ गुबार निकाला। दूसरी तरफ मृतकों के परिजनो ने रोष व्यक्त करते हुए प्रशासन की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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श्री पारस अस्पताल में जांच के लिए आए अधिकारी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन पर नहीं रहा है भरोसा
इस जांच के बाद मुझे प्रशासन पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। जांच के नाम पर हमारे साथ सरासर धोखा हुआ है। किसी के साथ अब अगर गलत होगा तो कौन प्रशासन से शिकायत करने जाएगा। न्याय के लिए लोग कहां गुहार लगाएंगे। हॉस्पिटल और प्रशासन की जांच में मिलीभगत रही है। लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। हमें यहां से इंसाफ नहीं मिला। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ते रहेेंगे। मेरे 30 वर्षीय बहनोई रजनीश की जान ऑक्सीजन नहीं मिलने से गई। चिकित्सक की सबसे बड़ी लापरवाही रही। मैंने खुद अपनी आंखों से वहां लाशों का मंजर देखा है। ऑक्सीजन के लिए मरीजों के परिजनों को तड़पते देखा है। -राजू सिंह यादव, भर्थना, इटावा

जांच को प्रभावित किया गया है
मेरे पिता वासुदेव चावला और भाई की बहू मनीषा चावला की मृत्यु ऑक्सीजन की कमी से हुई थी। प्रशासन की जांच से मेरा पूरा परिवार दुखी है। परिजनों की मृत्यु से जो पीड़ा थी, जांच के बाद वह और असहनीय हो गई है। डॉ. अरिन्जय जैन के सत्ता पक्ष से संबंध हैं।

जांच को प्रभावित किया गया है। डीएम साहब ने दबाव में जांच रिपोर्ट बनाई है। वो कह रहे हैं कि तब ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी। तो फिर बताएं कि अस्पतालों ने परिजनों से क्यों सिलिंडर मंगाए। डीएम साहब रात में लोअर-टीशर्ट पहनकर ऑक्सीजन टैंकर की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए क्यों दौड़ते रहे। क्यों टेढ़ी बगिया प्लांट पर तहसीलदार ने पुलिस से ऑक्सीजन लेने आए लोगों पर लाठियां चलवाईं। -अशोक चावला, जीवनी मंडी 

श्री पारस अस्पताल प्रकरण: 12वें मृतक के पिता दूरबीन सिंह - फोटो : अमर उजाला
दबाव में बनाई गई है जांच रिपोर्ट 
मुझे पहले से पता था कि प्रशासन क्या जांच करेगा। अब रिपोर्ट आने के बाद मैं कुछ नहीं कहना चाहती। बस, इतना कहूंगी कि जांच रिपोर्ट गलत है। आईएमए के दबाव में रिपोर्ट बनाई गई है। मुझे नहीं लगता कि प्रशासन ने मामले में सच्चाई जानने की कोशिश की है। अब मुझे प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं रही। हमने अपना मरीज खो दिया। मेरी ननद मीना ग्रोवर की मृत्यु 26 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में हुई थी। चिकित्सक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की थी। लगता है हमारी शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। 
-गीतिमा ग्रोवर, दयालबाग

हाईकोर्ट में दायर करेंगे याचिका
श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से मौतों का आरोप लगा रहे शिकायकर्ता प्रशासनिक जांच से असंतुष्ट हैं। वे सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में जुट गए हैं। दो परिजनों को खोने वाले अशोक चावला, सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस, एडवोकेट नरेन्द्र सोनी, देवेश चौधरी ने कहा कि पीड़ितों के हक की लड़ाई अब हाईकोर्ट में लड़ी जाएगी। उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। ताकि लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। युवा बार एसोसिएशन के एडवोकेट मनोज कुमार ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए।
 
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मौतों पर उठे सवाल
- 26 अप्रैल को ही ऑक्सीजन की मॉकड्रिल क्यों की गई
- प्रशासन ने पीड़ितों के बयानों को अहमियत क्यों नहीं दी
- 96 मरीज भर्ती थे तो सबका डेथ ऑडिट क्यों नहीं किया
- ऑक्सीजन की कमी नहीं थी, तो मरीज डिस्चार्ज क्यों किए
- वीडियो में चिकित्सक की कही बातों की क्या जांच हुई
- 26 व 27 अप्रैल की सीसीटीवी फुटेज कैसे गायब हो गई
- अस्पताल पर पिछले साल लगाई सील दोबारा क्यों खोली

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