श्री डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी दिव्यांग छात्रवृत्ति पाकर सैकड़ों मेधावियों की जिंदगी बदल गई। अपनी मेहनत और छात्रवृत्ति के सहयोग से किसी ने नौकरी हासिल कर परिवार संभाला तो किसी को अपना रोजगार चुनने में मदद मिली। यह छात्रवृत्ति विकलांग सहायता संस्था आगरा शाखा (मुख्यालय मथुरा) और अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान दी जाती है। छात्रवृत्ति पाने वालों में कई ऐसे हैं, जो इन संस्थाओं से प्रेरणा लेकर अब खुद दूसरों की मदद कर रहे हैं।
सुहैल को मिली 12 लाख सालाना वेतन पर नौकरी
आईआईटी चेन्नई के छात्र अलीगढ़ निवासी मोहम्मद सुहैल को यह छात्रवृत्ति वर्ष 2014 से प्रति वर्ष दी जा रही थी। मोहम्मद सुहैल ने अपनी प्रतिभा के बल पर भारत लैबोरेटरी हैदराबाद में 12 लाख रुपये सालाना वेतन पर नौकरी हासिल कर मिसाल पेश की है। सुहैल अब अपने जैसे किसी दिव्यांग छात्र को आर्थिक मदद कर उसे प्रोत्साहित करना चाहते हैं।
15 वर्षों से एक छात्र को दे रहे छात्रवृत्ति मनोज
डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आगरा में संजय प्लेस स्थित प्रशासनिक कार्यालय में डिप्टी मैनेजर के पद पर तैनात मनोज अग्रवाल को वर्ष 1996 से 98 तक संस्था से 2400 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। एसबीआई में नौकरी लगने पर मनोज 15 वर्षों से प्रति वर्ष एक छात्र की छात्रवृत्ति 10,000 रुपये प्रदान कर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
विप्रो कंपनी ने योगेश को बनाया आत्मनिर्भर
स्वामी राम भद्राचार्य दिव्यांग विश्व विद्यालय चित्रकूट से एमसीए कर रहे अछनेरा निवासी योगेश कुमार को हैदराबाद की विप्रो कंपनी ने 30,000 रुपये प्रतिमाह पर ट्रेनी इंजीनियर के रूप में नौकरी दी है। श्री डोरीलाल अग्रवाल मेधावी दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के तहत इनको डॉ. रंजना बंसल के सौजन्य से 24000 रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
ताजगंज निवासी रंजीत ने खोला जनसुविधा केंद्र
ताजगंज आगरा निवासी दिव्यांग रंजीत ने शांति मांगलिक अस्पताल में विकलांग सहायता संस्था आगरा शाखा की ओर से संचालित श्री पीसी मांगलिक चैरिटेबल कंप्यूटर सेंटर में कंप्यूटर ट्रेनिंग का प्रशिक्षण वर्ष 2015 में लिया और अब ताजगंज में स्वयं का जनसुविधा केंद्र खोल लिया है। रंजीत इस केंद्र से औसतन प्रतिमाह बीस हजार रुपये महीने कमा रहे हैं।
आगरा में बैंक में नौकरी पाकर विमल यादव बने परिवार का सहारा
प्रयागराज निवासी दृष्टिबाधित विमल यादव एक निर्धन परिवार से हैं। अपनी पढ़ाई व अन्य खर्चों के लिए वह अपने परिवार पर आश्रित थे। वर्ष 2018 से 2020 तक उन्हें श्री डोरीलाल अग्रवाल छात्रवृत्ति प्रदान की गई। 2021 में विमल ने बैंक की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण की। अब वह आगरा में आर्यावर्त बैंक में 30,000 रुपये प्रतिमाह वेतन पर कार्य कर रहे हैं।
आठ लाख रुपये सालाना वेतन पर मयंक प्रसाद को मिली नौकरी
आईआईटी गुवाहाटी में अध्ययनरत बिहार निवासी दिव्यांग मयंक प्रसाद को आठ लाख रुपये सालाना वेतन पर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने नौकरी दी है। मयंक को पढ़ाई के दौरान डोरीलाल अग्रवाल मेधावी दिव्यांग छात्रवृत्ति के रूप में 24,000 रुपये प्रति वर्ष प्रदान किए गए।
सत्र न्यायालय देवरिया में लिपिक रत्नेश दूसरों को करते हैं प्रेरित
35000 रुपये प्रति माह वेतन प्राप्त कर रहे छात्रवृत्ति लाभार्थी रत्नेश कश्यप सत्र न्यायालय देवरिया में लिपिक पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अन्य दिव्यांग छात्र-छात्राओं को भी प्रेरित कर रहे हैं।