अकोला। कस्बा अकोला में दशहरा पर टेसू-झांझी की दुकानें सज गई हैं। बाजार में जगह-जगह टेसू-झांझी की रंग-बिरंगी मूर्तियां सजाई गई हैं। त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, खासकर बच्चों में इस पर्व को लेकर अलग ही उमंग है। टेसू-झांझी का यह त्योहार ब्रज क्षेत्र की प्राचीन लोक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि दशहरे के बाद से लेकर शरद पूर्णिमा तक बच्चे टेसू-झांझी की शादी रचाते हैं और लोकगीत गाते हैं। यह त्योहार प्रेम, भाईचारे और लोक संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
अकोला बाजार में दुकानदारों ने मिट्टी से बने सुंदर टेसू-झांझी बनाकर दुकानों में सजाए हैं। अलग-अलग रंगों और डिजाइनों में बने टेसू-झांझी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। 20 रुपये से लेकर 150 रुपये तक के टेसू-झांझी बाजार में बिक रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस बार बिक्री अच्छी हो रही है। महंगाई के बावजूद लोग परंपरा को निभाने के लिए टेसू-झांझी जरूर खरीद रहे हैं। शाम के समय बाजार में बच्चों की भीड़ टेसू-झांझी की दुकानों पर देखी जा सकती है। बच्चे टोली बनाकर टेसू-झांझी के गीत गाते हुए घर-घर जाकर चंदा भी इकट्ठा करते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि यह त्योहार ब्रज की संस्कृति को जिंदा रखे हुए है, इसे आगे भी बनाए रखना जरूरी है।