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Atique Ahmed Death: शूटर अरुण का पिता बना रहा था गोलगप्पे, तभी सामने आया अतीक-अशरफ की हत्या का वीडियो

Sun, 16 Apr 2023 03:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

शूटर अरुण कुमार आर्य का पिता गोलगप्पे की ठेल लगाता है। बेटे की करतूत से अंजान पिता ने जब सोशल मीडिया पर वीडियो देखा तो पत्नी और बेटी को लेकर फरार हो गया।
 
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शूटर अरुण और गांव स्थित उसका घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माफिया अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या करने वाले तीन शूटरों में एक शूटर जिले के सोरोंजी थाना क्षेत्र के गांव कादरवाड़ी का निकला है। यह शूटर अरुण मौर्य पुत्र दीपक कुमार उर्फ मैनेजर निवासी कादरवाड़ी है। अरुण मौर्य कई वर्षों से पानीपत में अपने भाई व अन्य परिवार के लोगों के साथ रह रहा है। गांव में उसका आना जाना भी कम है। पिता दीपक कुमार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके बेटे ने माफिया अतीक अहमद एवं अशरफ की हत्या कर दी है। सुबह नौ बजे तक दीपक कुमार उनकी पत्नी केला देवी और बेटी सपना गांव में थे और गोलगप्पे की ठेली लगाने की तैयारी कर रहे थे। जब सोशल मीडिया से सुबह आठ बजे के बाद उन्हें बेटे की करतूत की जानकारी मिली तो पूरा परिवार कुछ ही देर में घर से फरार हो गया। तब तक पुलिस भी उनके घर नहीं पहुंची थी। 
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गांव के लोगों ने बताया कि सुबह आठ से नौ बजे के बीच परिवार के लोग गोलगप्पे की तैयारी कर रहे थे। उसके बाद अचानक कहीं चले गए। सोरोंजी इंस्पेक्टर डीके त्यागी पुलिस टीम के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने प्रयागराज से आए फोटो के माध्यम से ग्रामीणों से अरुण मौर्य की पहचान कराई और परिवार के बारे में जानकारियां जुटाईं। ग्रामीणों को जब इस मामले की जानकारी हुई तो वे भी चौंक गए और चुप्पी साध गए।

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पानीपत में ही हुआ अरुण का जन्म, वहीं रहता था

शूटर अरुण मौर्य के पिता दीपक कुमार अपने पिता मथुरा प्रसाद के साथ काफी पहले से पानीपत में रहकर मजदूरी का काम करते थे। गांव में उनके पास डेढ़ बीघा जमीन है जिससे गुजारा नहीं हो पाता था। पानीपत में ही अरुण का जन्म हुआ। उसके बाद भी उन्होंने कई वर्षों तक पानीपत में मजदूरी आदि का काम किया। आठ साल पहले दीपक कुमार गांव में चले आए। यहां आकर पहले ऑटो चलाया। कई वर्ष तक ऑटो चलाने के बाद ऑटो का एक्सीटेंड हो गया। उसके बाद से उन्होंने गोलगप्पे की ठेली लगाना शुरू कर दिया। 

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छह महीने पहले गांव में आया था शूटर

शूटर अरुण मौर्य पानीपत में ही रहता था, लेकिन करीब छह महीने पहले वह पानीपत में किसी से झगड़ा होने के बाद गांव आया था। उसके हाथ में फ्रैक्चर था। यहां तीन दिन रुकने के  बाद वह वापस चला गया।

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