बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
यह था मामला
चार जुलाई को युवती ने आत्महत्या की थी। पिता ने आरोप लगाया था कि पड़ोसी से विवाद चल रहा है। एक जनवरी को बेटी और भतीजी को रास्ते में रोका गया था। उनसे दो युवकों ने अभद्रता की थी। पुलिस ने मुकदमा 17 फरवरी को लिखा। थाने चौकी के चक्कर काटे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने बयान तक नहीं लिखे। इससे परेशान बेटी ने आत्महत्या कर ली। मामले में अमर सिंह, प्रवेंद्र और डिंपल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने प्रवेंद्र को जेल भेज दिया। मामले में विवेचक दीपक चौधरी को लाइन हाजिर किया गया था।
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पिता के ये पांच सवाल
- विवेचक ने 17 फरवरी को दर्ज हुए मुकदमे की विवेचना में लापरवाही क्यों बरती? उसका निलंबन क्यों नहीं किया गया?
- घटना 1 जनवरी को हुई थी। बेटी की मौत के बाद पुलिस पुराने मुकदमे में विवेचना कर रही है? घटनास्थल पर गई। अब अब क्या मिलेगा?
- पुलिस आरोपियों पहचान कैसे करेगी? वह चेहरा छिपाकर आए थे। बेटियों को धमका गए थे? इतने पुराने कोई सीसीटीवी फुटेज मिलना आसान नहीं है।
- दो आरोपी अभी नहीं पकड़े गए। वह घर से चले गए हैं। वह कब पकड़े जाएंगे।
- पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गई। पर्यवेक्षक पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?