शोध में खुलासा: नजर हुई धुंधली, किडनी-हृदय की भी लगी बीमारियां, मधुमेह के मरीजों को ये लापरवाही पड़ रही भारी
Sun, 20 Sep 2026 05:13 PM IST
Arun Parashar
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
सार
शोध में पता लगा कि मरीजों ने ब्लड शुगर और एचबीएवनसी की जांच में भी सुस्ती बरती। इससे 97 मरीजों का मधुमेह स्तर अनियंत्रित रहा। इससे उनकी नजर कमजोर हो गई। इसके साथ ही किडनी और हृदय समेत अन्य बीमारियों के भी वह शिकार हो गए।
डॉक्टर तो ऐसे ही कहते हैं एक रसगुल्ला से कुछ नहीं होता। नियमित दवाएं न लेने के साथ फिटनेस पर भी ध्यान नहीं देना। ये सभी लापरवाही मधुमेह मरीजों को भारी पड़ गईं। उन्हें न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी और नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर बीमारियों ने घेर लिया। इससे न सिर्फ आंखों की रोशनी घट गई बल्कि किडनी-हृदय की बीमारियां भी हो गईं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के सोशल प्रिवेंटिव मेडिसिन (एसपीएम) विभाग के शोध में लापरवाही बरतने वाले 30.03 फीसदी मधुमेह मरीज कई बीमारियों से पीड़ित मिले। विभाग ने एक साल में 30 से 65 साल तक के 323 (144 पुरुष, 179 महिलाएं) मरीजों पर शोध किया। इनमें 76.6 फीसदी शहरी और 25.4 ग्रामीण क्षेत्र के रहे। इनकी डाइट, शारीरिक गतिविधि, ब्लड शुगर, एचबीएवनसी टेस्ट की जानकारी जुटाने के साथ कई जरूरी जांचें भी कराई गईं।
शोध में देखा गया कि 70 फीसदी यानी 226 मरीजों ने डॉक्टरी सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। मीठा, कोल्डड्रिंक, फास्टफूड भी खाया। रोजाना पैदल चलने, व्यायाम करने से भी परहेज किया। ब्लड शुगर और एचबीएवनसी की जांच में भी सुस्ती बरती। इससे 97 मरीजों का मधुमेह स्तर अनियंत्रित रहा। इससे उनकी नजर कमजोर हो गई।
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तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ने से किडनी-हृदय रोग की क्षमता भी प्रभावित हुई। नसें कमजोर होने से धमनियों में वसा की भी परेशानी बन गई। डॉक्टर की बात नहीं मानने से कई गंभीर रोग हो गए। वहीं डॉक्टरी सलाह पर अमल करने वाले मरीजों को राहत मिली।
शोध में धर्म, उम्र, शिक्षा, आर्थिक स्थिति समेत कई बिंदुओं को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि उच्च शिक्षित मरीजों ने भी डॉक्टरी सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक थी। दवाएं लेने में भी कोताही बरती। इससे गंभीर समस्या हुई। -प्रो. शैलेंद्र चौधरी, अध्यक्ष, एसपीएम विभाग
शोध में चिंताजनक बात यह सामने आई कि मधुमेह पीड़ितों में 30-40 साल के युवा भी अधिक मिले। इनमें कई छात्र भी हैं। खराब फिटनेस और खानपान की वजह से उन्हें अन्य गंभीर बीमारियों ने घेर लिया। इससे पढ़ाई-लिखाई के साथ कॅरिअर पर भी असर पड़ा। - डॉ. हिमालय सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसपीएम विभाग
शोध में मरीजों ने मधुमेह के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। इससे उनकी आंखों की रोशनी कम हो गई। नसें कमजोर होने के साथ किडनी-हृदय रोग की परेशानी भी बन गई। इसके संकेत मिलने के बाद भी कई लोगों ने सुधार नहीं किया और जांच से भी बचते रहे। - डॉ. कुमार अमरेंद्र, शोधार्थी, एसपीएम विभाग
ये दिए सुझाव:
- डॉक्टरी सलाह को गंभीरता से लें, खानपान-दिनचर्या सुधारें।
- रोजाना 10 हजार कदम चलें, साइकिल भी चलाएं।
- कोल्डड्रिंक, फास्टफूड, मीठा और तले भोजन से बचें।
- ग्लूकोज का स्तर अनियंत्रित होने पर डॉक्टर से मिलें।
- मधुमेह मरीज किडनी, आंख और नसों की भी जांच कराएं।