इस बार जब नेताजी की कर्मभूमि मैनपुरी में उपचुनाव हो रहा है तो शिवपाल की खामोशी से सियासत के चाणक्यों ने अपने-अपने अंदाज से मंसूबे गढ़ लिए थे। उनका मानना था कि फिरोजाबाद की तरह भी यहां भी शिवपाल सिंह यादव डिंपल यादव की राह का रोड़ा बनेंगे। साइकिल की रफ्तार कम होगी तो कमल खिलाने में आसानी होना तय थी, लेकिन बृहस्पतिवार को सैफई में चाचा शिवपाल सिंह यादव से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव ने मुलाकात की, तो रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई।
शिवपाल ने किया था यह ट्वीट
शिवपाल भी परिवार के लिए नर्म हुए और उन्होंने बहू डिंपल यादव की जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने का आश्वासन दे डाला। उन्होंने ट्वीट कर यहां तक कह दिया कि हम अपने खून पसीने से उस बाग को सींचेंगे, जिसे नेताजी ने सींचा है।
शिवपाल सिंह थोड़े से नर्म हुए तो मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र की पूरी सियासत ने यहां से करवट बदल ली। अब डिंपल यादव के साथ मुलायम सिंह यादव की विरासत और चाचा शिवपाल सिंह यादव की सियासत दोनों हैं, ऐसे में विपक्षियों को अब साइकिल की रफ्तार कम करने के लिए कोई और रणनीति तलाशनी होगी।
दुविधा की स्थिति से उबरा जसवंतनगर
मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट भी शामिल है। खुद नेताजी का गांव सैफई भी इसी का एक हिस्सा है। वर्तमान में भी शिवपाल सिंह यादव यहां से विधायक हैं, साथ ही इस क्षेत्र में उनका प्रभाव जग जाहिर है। ऐसे में जब डिंपल यादव को सपा ने मैनपुरी के उपचुनाव में बतौर प्रत्याशी उतारा तो जसवंतनगर के लोगों में भी दुविधा थी, कि आखिर वे किसके साथ जाएंगे।
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वे निर्णय क्या करें। एक तरफ जहां उनके लोकप्रिय नेता शिवपाल सिंह यादव थे तो वहीं दूसरी तरफ नेताजी की पुत्रवधू और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, लेकिन शिवपाल सिंह के साथ आने के बाद अब जसवंतनगर भी दुविधा से उबर आया है। ऐसे में यहां भी साइकिल की रफ्तार अब पहले से तेज नजर आएगी।