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सारस्वत एन्क्लेव स्थित मंदिर में हुआ शिव विवाह कार्यक्रम

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टूंडला के शिवमंदिर में शिवविवाह के दौरान महिला मंडल - फोटो : TUNDLA
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टूंडला। भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो या फिर सच्चे प्रेम की प्राप्ति करना चाहते हैं, उन्हें शिव-पार्वती की आराधना अवश्य करनी चाहिए। यह बात कथा वाचक अंबरीश कुलश्रेष्ठ ने सारस्वत एन्क्लेव स्थित मंदिर में शिव-पार्वती के विवाह अनुष्ठान कार्यक्रम के दौरान कहीं।
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उन्होंने कहा कि हमारे इष्टदेवों से ओतप्रोत कार्यक्रम हमें हमारी धार्मिकता से अवगत कराते हैं। धार्मिक आयोजनों से मन को तृप्ति मिलती है। माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की इच्छुक थीं। सभी देवता गण भी इसी मत के थे कि राजकन्या पार्वती का विवाह शिव से हो। शिव को अपना वर बनाने के लिए माता पार्वती ने बहुत कठोर तपस्या शुरू कर दी। उनकी तपस्या के चलते भोलेनाथ पिघल गए और उनसे विवाह करने के लिए राजी हो गए।
भगवान शिव ने अपनी बारात में डाकिनियां, भूत-प्रेत और चुड़ैलों को साथ ले जाने का निर्णय किया। जब ये अनोखी बारात पार्वती के द्वार पहुंची, सभी देवता हैरान रह गए। वहां खड़ीं महिलाएं भी डर कर भाग गईं। भगवान शिव को इस विचित्र रूप में पार्वती की मां स्वीकार नहीं कर पाईं और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया। जब भगवान शिव दिव्य रूप में पहुंचे तो पार्वती की मां ने उन्हें तुरंत स्वीकार कर लिया और ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह शुरू हो गया।
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माता पार्वती और भोलेबाबा ने एक दूसरे को वर माला पहनाई और तब उनका विवाह संपन्न हुआ। कथा में विनती सारस्वत, नीता श्रोत्रिया, रेखा उपाध्याय, अनीता चौधरी, रागिनी गौतम, ललिता शर्मा, पूजा शर्मा, सपना श्रोतिया, संध्या तिवारी, मंजू शर्मा, ऊषा गुप्ता, मंजू चौहान, गायत्री उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
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