शायर कलीम समर ने कुछ यूं बयां किया, ‘मरने से क़ब्ल बीवियां मेरी बची थीं तीन, जो कुछ भी जायदाद थी तीनों में बांट दी’। सदारत कर रहे डॉ. हिलाल बदायूंनी ने अर्ज किया ‘मुकद्दर में हमारे कब है बिस्तर, सफर में नींद पूरी कर रहे हैं’। सलीम अमरोहवी ने पेश किया ‘उसने वादा किया है आने का, राह हम क्यों ना उम्रभर देखें’। शाहिद अंजुम ने अपने शेर से ऊंचाइयों पर पहुंचाया ‘हवा किसी की तरफ देर तक नहीं रहती, चराग़ सोच रहे हैं हवा हमारी है’। डॉ. नदीम शाद ने कुछ यूं कहा ‘ये नाक़दरी हमारी इसलिए है, तेरा होने में जल्दी कर गए हम’।
डॉ. साबिर बेहटवी ने कलाम पढ़ा ‘भले ज़रा सा हो लेकिन ज़रूर होता है, बुलंदियों पे पहुंचकर ग़ुरूर होता है’। कुंवर जावेद ने बयां किया ‘सितम तो ये है उसी से दुआ सलाम नहीं, वो जिसके घर के बराबर में घर हमारा है’। डाॅ. सबा बलरामपुरी ने यह सुनाकर दाद पाई ‘ना सितारे फूल जुगनू ना तो आफताब आए, तेरी मुंतज़िर हैं आंखें इन्हें तेरा ख़्वाब आए’। अतुल अजनबी, दाऊद इकबाल ने भी अपनी रचनाओं से वाहवाही लूटी।
देर रात तक मुशायरा चलता रहा। संचालन शायर अमीर अहमद एडवोकेट ने किया। तरुण पाठक, कर्नल जीएम ख़ान, डॉ. त्रिमोहन तरल, अब्दुल क़ुद्दूस ख़ां, हरीश चिमटी, भरतदीप माथुर, ज़ाकिर सरदार, पूनम ज़ाकिर, डॉ. नसरीन बेगम, मोहम्मद हुसैन, समी आगाई, महमूद उज्जमा, शिवराज यादव आदि ने शायरों का इस्तकबाल किया।