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घूंघट त्यागा, हैंडल पकड़ा: पर्यटकों को कराएंगी असली शहर का दीदार

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ई-रिक्शा चलातीं महिलाएं
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आगरा। किसी के परिवार ने उसे ठुकराया तो किसी के पति ने धोखा दिया। किसी का पति हादसे में चल बसा तो किसी को आर्थिक तंगी ने तोड़ा। परिवार और बच्चों के लिए उन्होंने घूंघट से नाता तोड़ा और थाम लिया ई-रिक्शा का हैंडल। पहले खुद घर की दहलीज लांघी और अब पर्यटकों को आगरा की सैर कराएंगी।
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शनिवार को शहर में एक नए उपक्रम ताज सिटी रिक्शा विमेन ऑन व्हील्स की शुरुआत की गई, जिसमें 10 महिलाओं को ई-रिक्शा सौंपे गए। ये महिलाएं पर्यटकों को शहर की ऐतिहासिक इमारतों के साथ स्वाद के ठिकानों और यहां के शिल्पकला से भी रूबरू कराएंगी। इसके लिए बाकायदा इन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया है।
ताज सिटी रिक्शा कार्यक्रम की शुरुआत में 10 जरूरतमंद महिलाओं का चयन कर उन्हें पहले ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। शनिवार को समारोह में चयनित महिलाओं को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी गई। एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज के सीईओ विपिन शर्मा ने बताया कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए आगरा से पहले जयपुर, उदयपुर, वाराणसी में भी इसका सफल संचालन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
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खास बात यह कि महिला चालक होने से महिला पर्यटक इनके साथ सहज और सुरक्षित महसूस करेंगी। इनका रूट इस प्रकार तय किया गया है कि वह सैलानियों को प्रमुख पर्यटन स्थल, खान-पान के स्वाद के साथ हस्तशिल्प के केंद्रों का भ्रमण कराएंगी, जिससे पर्यटक शहर की वास्तविक तस्वीर देख सकेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष डाॅ. मंजू भदौरिया ने हरी झंडी दिखाकर चालकों को रवाना किया। कार्यक्रम का संचालन युक्ति ने किया। व्यवस्थाएं दिनेश सुथर ने संभालीं।
पति के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी
शुरुआत से संघर्ष किया है। बीएससी तक पढ़ी हूं। शादी के बाद पुलिस भर्ती में चयन हो गया, लेकिन पति ने उन्हें नौकरी जॉइन नहीं करने दी। बच्चों को पढ़ाने से इन्कार कर दिया तब बच्चों की परवरिश के लिए खुद से काम करना शुरू किया। इस काम में सम्मान है और घर और बच्चों को चलाने लायक आमदनी भी हो जाएगी। - लता कुमारी, लकावली


बेटी की खातिर चलाया ऑटो
उमा यादव पिछले चार सालों से ऑटो चला रही हैं। अब वह ई-रिक्शा चलाएंगी। कहती हैं छोटे बच्चे वाली महिला को कोई काम नहीं देता। बेटी की परवरिश के लिए रुपयों की जरूरत थी। मायके में भी कोई नहीं है। ऐसे में ऑटो सबसे अच्छा विकल्प था। बच्ची को साथ रखते हुए मैं काम भी कर पा रही हूं और आमदनी भी। - उमा यादव, रामबाग
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