स्वच्छ भारत मिशन में आगरा प्रदेश में तीसरे स्थान से लुढ़क कर 74 वें स्थान पर पहुंच गया है। साढ़े तीन माह से भुगतान रोकने के कारण खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) के लिए चयनित 150 ग्राम पंचायतों में शौचालय बनाने का काम ठप पड़ गया है। पहले चरण में ही अभियान की पोल खुल चुकी है। दूरदराज के गांवों को छोड़िए शहर से सटे गांव कौलक्खा में महज 70 घरों में ही शौचालय बनाए जा सके हैं।
पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त अभियान के तहत पहले चरण में 150 गांवों में काम शुरू किया गया। इसमें दस करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद भी हालात नहीं बदल सके हैं। ग्राम प्रधानों को हर घर में शौचालय बनवाने का टारगेट दिया गया, लेकिन पिछले चार माह से भुगतान बंद कर दिया गया। जिन 150 गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने का दावा किया गया था, वह भी खोखला साबित हुआ है।
हमारी टीम ने चयनित गांव कौलक्खा का दौरा किया। गांव में लगभग 70 घरों में ही अब तक शौचालय बनवाए जा सके हैं। 54 घरों में शौैचालय बनवाने का काम पैसा नहीं होने के कारण अधूरा पड़ा है। गांव के मुकेश कहते हैं कि प्रधान ने गांव के कुछ घरों में ही शौैचालय बनवाने को पैसा दिलवाया। अब भी गांव के ज्यादातर लोग खुले में शौैच जाने को मजबूर हैं।
मुख्य बिंदु
30 मार्च तक 695 ग्राम पंचायतों को किया जाना है खुले में शौच से मुक्त
सितंबर तक 150 गांवों में भी परवान नहीं चढ़ सकी योजना
काम लटक गया: प्रधान
कई माह से शौचालय योजना का पैसा नहीं आ रहा है। इसके कारण कई घरों में गड्ढे खोदकर डाल दिए हैं। ग्रामीण उन पर दबाव बनाते हैं। अभी तक तो गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने का सपना अधूरा ही है।
सुनहरी लाल, प्रधान, कौलक्खा
प्रचार-प्रसार का भुगतान भी बंद
योजना के तहत शासन से स्वच्छता दूत, निगरानी समिति, ग्राम प्रधान-सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए स्वच्छता दूतों और प्रचार प्रसार के लिए भुगतान भी किया जाना था, लेकिन ये भुगतान भी बंद कर दिया गया है।