केशवदेव मंदिर में ठाकुरजी का श्रीविग्रह
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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन ही चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस खास अवसर पर ठाकुरजी के दर्शन के लिए ब्रज में सभी मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जिससे धवल चांदनी के बीच भक्तजन अपने इष्टदेव के दर्शन कर सकें।
मथुरा के ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदें गिरती हैं। रात में आसमान के नीचे खीर रखी जाती है, जिससे खीर भी अमृत के समान हो जाती है। चंद्र देवता की विशेष पूजा कर खीर का भोग लगाया जाता है।
मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में शरद पूर्णिमा की तैयारियां हो रही हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित केशवदेव मंदिर को सजाया जा रहा है। ठाकुरजी के शृंगार के लिए विदेशी फूलों का उपयोग किया जाएगा। यहां गर्भ गृह चबूतरा पर महारास रात 11 बजे तक होगा। 11:30 बजे तक केशवदेव के दर्शन होंगे।