सह सरकार्यवाह ने कहा कि आगरा के लोग ही अपने गौरवशाली इतिहास को भूलते जा रहे हैं। अपनी चतुराई और रणनीतिक कार्यशैली से छत्रपति शिवाजी आगरा से औरंगजेब की कैद से मुक्त हुए। यह घटना पूरे विश्व के लिए यह एक शोध का विषय है, लेकिन हम उसे एक स्मारक के रूप में आगे नहीं बढ़ा पा रहे। उन्होंने फव्वारा चौराहे स्थित कोतवाली पर गोकुलाजाट और फतेहपुर सीकरी में राणा सांगा के क्रूर मुगल बादशाह के साथ हुए युद्ध में धर्म की रक्षा के लिए दी गई प्राणों की आहुति का स्मरण कराया।
कहा कि आगरा के निकट वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन के भक्ति आंदोलन के जरिये वहां के साधु-संतों और सनातनियों ने जो बलिदान दिया है, उसे भी हम लोग समाज के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। माधव भवन में ऐसी शोध की व्यवस्था होगी जो उस कालखंड के दस्तावेजों को सुरक्षित करे। साथ ही वर्तमान समाज के सामने बलिदान और गौरवशाली इतिहास को बाहर निकालने का काम करे।
कार्यक्रम के दौरान शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि संघ पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने वाले प्रश्नों का उत्तर भावनात्मक नहीं, बौद्धिक स्तर से दिया जाना चाहिए। इस काम को करने के लिए माधव भवन को हवा महल जैसा हवा खाने का केंद्र नहीं बल्कि ऐसा केंद्र बनना चाहिए जहां अध्ययनशील कार्यकर्ता समाज को प्रभावी बौद्धिक उत्तर दे सकें। ज्ञानवान कार्यकर्ता ही विधर्मियों को करारा उत्तर दे सकते हैं क्योंकि चिंतन केवल सनातन के पास है। दूसरे धर्म तो अनावश्यक विमर्श खड़ा करने में माहिर हैं।
इस अवसर पर अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गोसंयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद के अलावा राकेश जैन, दिनेश उपाध्याय मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने किया। परिचय केशव शर्मा ने कराया और धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने दिया।
http://