शमसाबाद के भवन गांव में मंगलवार शाम करीब छह बजे पुलिया के अंदर जंगली जानवर बंद कर लिया गया। ग्रामीणों को लगा कि यह तेंदुआ है। इस पर पुलिया को एक ओर से मिट्टी और दूसरी और ईंट पत्थर से बंद कर दिया गया। वे लोग समझ रहे थे कि महीने भर से जो तेंदुआ नजर आ रहा था, वही जाल में फंस गया है। लेकिन देर रात पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने पदचिह्न देखकर बताया कि वह तेंदुआ नहीं, बल्कि लकड़बग्घा है। उसे बुधवार सुबह निकाला जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि फतेहाबाद इरादतनगर बाईपास पर किसान हरेंद्र सिह आलू के खेतों में पानी लगा रहा था। पास ही बनी पुलिया के नीचे उसे जंगली जानवर दिखाई दिया। उसने तेंदुआ समझा। इसी वह ग्रामीणों के साथ हल्ला मचाते हुए पुलिया की तरफ पहुंचा।
उधर, हल्ला सुनकर दौड़ लगाता हुआ जानवर आधा किलोमीटर दूर गांव भवन के पास बनी पुलिया के अंदर घुस गया। इस बीच काफी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। उन्होंने पुलिया को घेर लिया और दोनों ओर से बंद कर दिया। सूचना के दो घंटे बाद वन विभाग की टीम और पुलिस पहुंच गई।
देर रात करीब साढ़े नौ बजे वन विभाग के अधिकारी भी पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बंद किया गया जानवर तेंदुआ नहीं है। उन्होंने आस पास बने जानवर के पद चिन्ह देखे। इसके आधार पर बताया कि निशान लकड़बग्घे के हैं। पत्थरों के बीच से झांककर भी देखा। यह लकड़बग्घा ही था।
बता दें, इलाके में एक महीने से तेंदुए का खौफ बना है। कई गांव वाले तेंदुआ दिखाई देने का दावा कर चुके हैं। कई लोग उसके हमले में घायल भी हुए हैं।