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शहीदों की याद में कुछ इस तरह से लगेगा मेला

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17एमएनपी-39-बेवर का शहीद स्मारक पुस्तकालय - फोटो : MAINPURI
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बेवर (मैनपुरी)। शहीदों की याद में 23 जनवरी से बेवर के रामलीला मैदान में शहीद मेला लगाया जाएगा। मेले की तैयारियों में आयोजक मंडल के सदस्य जुटे हुए हैं।
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शहीदों की याद में रामलीला मैदान में लगने वाले शहीद मेले के लिए कार्यक्रम संयोजकों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। 15 अगस्त 1972 को स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण त्रिपाठी के प्रयासों से थाने के सामने बने शहीद स्मारक भवन पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन शुरू किया गया था। तीन वर्षों तक तीन दिवसीय मेला 14 अगस्त से 16 अगस्त तक लगाया जाता रहा। वर्ष 1986 में शहीद मेले की अवधि बढ़ाकर आठ दिन कर दी गई। वर्ष 1992 में मेले की अवधि 15 दिन की गई। लोगों की मांग पर दो साल से मेला की अवधि को 23 जनवरी से 10 फरवरी तक बढ़ा दिया गया है। मेला संयोजक राज त्रिपाठी ने बताया बेवर का शहीद मेला मात्र रस्मी आयोजन नहीं है। मेले के माध्यम से राष्ट्र्रीय स्वाधीनता को सुदृढ़ करने, रक्षा करने, समाज के चर्तुमुखी विकास के माध्यम से मेहनतकश लोगों की सही आजादी बनाने के लिए एक जन आंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
शहीद मेले का इतिहास
वर्ष 1942 में 14 अगस्त को जूनियर हाईस्कूल बेवर के छात्रों और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर जुलूस निकाला। कुछ युवकों ने थानेदार आले अली की पिस्तौल छीनकर थाने पर कब्जा कर लिया। रात में भारी पुलिस बल बेवर में पहुंच गया। अगले दिन 15 अगस्त को छात्रों और युवकों द्वारा निकाले गए जुलूस पर की गई फायरिंग में कक्षा सात के छात्र कृष्ण कुमार के अलावा जमुना प्रसाद त्रिपाठी, सीताराम गुप्त शहीद हो गए। बेवर सहित देश के शहमदों की याद में 1972 से शहीद मेला का आयोजन होता है।
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