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बेटी पराया धन, पुरुषों की नहीं बदल रही सोच 

Fri, 02 Sep 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के मुकाबले गांवों में बेटियों की -08 फीसदी गिरावट - फोटो : demo
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बेटियां बोझ नहीं, प्रकृति की जननी है बेटी जैसे तमाम स्लोगन, बेटियां बचाने को सामाजिक आंदोलन भी, लेकिन जनपद में बेटियोें की गिरावट से साफ है कि बेटियां पराया धन, जैसी सोच अभी भी लोगों के दिमाग पर हावी है। इसको मानने में ग्रामीण अव्वल हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कुछ ऐसा ही बताते हैं। देहात में बेटियाें की संख्या में -08 प्रतिशत की कमी आई, शहर में यह स्थिति -01 फीसदी की रही। जनपद में 2001 के मुकाबले 2011 में -05 फीसदी की गिरावट आई है। ग्रामीण क्षेत्र में काउंसलिंग करने वाली राकेश देवी बताती हैं कि ससुर, पति से बात करते हैं, अधिकांश बेटी को पराया धन ही मानते। सास भी इनका पक्ष लेते दिखती हैं, ऐसे में महिला बेबस नजर आती हैं।
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0-6 साल तक प्रति हजार बच्चों पर बच्चियां   
                   2001           2011          गिरावट 
कुल               866             861         -05
ग्रामीण             870             862         -08
शहर               859             858         -01

इन तहसीलों में बढ़ी संख्या: 
तहसील         2001             2011          बढ़ोत्तरी
सदर            856               858             02
खेरागढ़         854               862             08

इन तहसीलों में आई कमी:
एत्मादपुर         880       864        -16
किरावली         872       859        -13
फतेहाबाद        892      868        -24
बाह             868        859        -09
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