शहर के मुकाबले गांवों में बेटियों की -08 फीसदी गिरावट
- फोटो : demo
बेटियां बोझ नहीं, प्रकृति की जननी है बेटी जैसे तमाम स्लोगन, बेटियां बचाने को सामाजिक आंदोलन भी, लेकिन जनपद में बेटियोें की गिरावट से साफ है कि बेटियां पराया धन, जैसी सोच अभी भी लोगों के दिमाग पर हावी है। इसको मानने में ग्रामीण अव्वल हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कुछ ऐसा ही बताते हैं। देहात में बेटियाें की संख्या में -08 प्रतिशत की कमी आई, शहर में यह स्थिति -01 फीसदी की रही। जनपद में 2001 के मुकाबले 2011 में -05 फीसदी की गिरावट आई है। ग्रामीण क्षेत्र में काउंसलिंग करने वाली राकेश देवी बताती हैं कि ससुर, पति से बात करते हैं, अधिकांश बेटी को पराया धन ही मानते। सास भी इनका पक्ष लेते दिखती हैं, ऐसे में महिला बेबस नजर आती हैं।
0-6 साल तक प्रति हजार बच्चों पर बच्चियां
2001 2011 गिरावट
कुल 866 861 -05
ग्रामीण 870 862 -08
शहर 859 858 -01
इन तहसीलों में बढ़ी संख्या:
तहसील 2001 2011 बढ़ोत्तरी
सदर 856 858 02
खेरागढ़ 854 862 08
इन तहसीलों में आई कमी:
एत्मादपुर 880 864 -16
किरावली 872 859 -13
फतेहाबाद 892 868 -24
बाह 868 859 -09