आगरा नगर निगम सदन के अधिवेशन में वेस्टर्न जोन सीवरेज प्रोजेक्ट की खामियों पर जमकर हंगामा हुआ। 20 से ज्यादा पार्षदों ने जलनिगम के वेस्टर्न जोन सीवरेज प्रोजेक्ट के हैंडओवर का विरोध किया। इस पर प्रस्ताव का समर्थन किया। सड़कों की खुदाई, सीवर चोक होने और घरों में सीवर भर जाने की शिकायतों के फोटो के साथ पार्षदों ने जलनिगम के खिलाफ नारेबाजी की। मेयर ने तय किया कि सीवर प्रोजेक्ट नगर निगम के हैंडओवर नहीं होगा।
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मेयर हेमलता दिवाकर ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें जलनिगम के वेस्टर्न जोन सीवरेज प्रोजेक्ट की जांच, जलनिगम इंजीनियर स्वतंत्र सिंह आदि पर कार्रवाई और सीवर लाइन बिछाने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की सिफारिश की जाएगी। वरिष्ठ पार्षद रवि बिहारी माथुर और राकेश जैन ने सीवर बिछाने वाली मनीषा कंस्ट्रक्शन कंपनी और ईएमएस इन्फ्राकॉन को ब्लैक लिस्ट करने और जलनिगम के प्रोेजेक्ट मैनेजर स्वतंत्र सिंह को निलंबित करने के साथ एफआईआर कराने का प्रस्ताव रखा था। पार्षदों ने मेयर के सामने सीवर बैकफ्लो होने की तस्वीरें दिखाईं।
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कंपनी से रिकवरी हो
पार्षद रवि बिहारी माथुर ने बताया कि 250 करोड़ रुपये खर्च हुए, पर सीवर प्रोजेक्ट में बिछाई सीवर लाइन धंस गई, चोक हो गईं। जिम्मेदार इंजीनियर पर कार्रवाई की जाए और उनके साथ कंपनी से रिकवरी हो, पूरे प्रोजेक्ट की जांच की जाए।
पाइप की मोटाई जांचें
पार्षद राकेश जैन का कहना है कि ईएमएस इन्फ्राकॉन ने 12 की जगह 10 मिमी के पाइप डाले हैं। पाइप की मोटाई और क्षेत्र के बाहर डाली गई सीवर की जांच भी हो। इंजीनियरों ने दबाव डालकर काम दिया गया, जबकि टेंडर उनके नाम नहीं था।
तीन साल से परेशान
पार्षद शरद चौहान ने बताया कि तीन साल से सीवर के कारण लोग परेशान हैं। तेलीपाड़ा, लोहामंडी, खतैना, भीमनगर में सीवर चोक है। धरने पर भी बैठ चुका, पर समस्या दूर नहीं हुई। अब इंजीनियरों और कंपनी पर कार्रवाई की जरूरत है।
अमर उजाला ने किया था गड़बड़ियों का खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने किया था गड़बड़ियों का खुलासा
शहर के वेस्टर्न जोन में 250 करोड़ रुपये के सीवर प्रोजेक्ट से 253 किमी लंबी सड़कों की दुर्दशा और सीवर लाइन चोक होने की समस्याओं को सबसे पहले ‘अमर उजाला’ ने उजागर किया था। जलनिगम के प्रोजेक्ट में मनीषा कंस्ट्रक्शन के साथ ईएमएस इन्फ्राकॉन से काम कराने की गड्बड़ियों और क्षेत्र के बाहर जाकर सीवर लाइन बिछाने, भुगतान लेने के मामले का खुलासा किया गया था। खबरों का संज्ञान लेते हुए पार्षदों ने हैंडओवर पर आपत्ति जताई और अधिशासी अभियंता स्वतंत्र सिंह पर एफआईआर, रिकवरी के प्रस्ताव का समर्थन किया।