आगरा में भीषण गर्मी और लू के कारण तरबूज, खरबूजा, ककड़ी जैसी बेल वाली फसलें झुलस रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। लगभग 40 हजार हेक्टेयर में फैली जायद फसलों पर तापमान का गंभीर असर दिख रहा है और सिंचाई भी राहत नहीं दे पा रही है।
पहले बेमौसम बारिश और आंधी का सितम झेलने वाली फसलों के लिए बढ़ता तापमान और लू कहर बन गई हैं। खेतों में खड़ी फसलों के पत्ते और बेल झुलस रहे हैं। उनकी वृद्धि रुक गई हैं। सिंचाई से भी कोई खास लाभ नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान खरबूजा, तरबूज, ककड़ी व अन्य बेल वाली फसलों को है।
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जिले भर में करीब 40 हजार हेक्टेयर में जायद के खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा व अन्य फसलें होती हैं। मई का महीना उनके लिए बहुत अहम होता है। इस समय लगभग 75 फीसदी फसल तैयार होने की कगार पर हैं। हालांकि लू का चलना खरबूजा और तरबूज के फलों में मिठास लाता है, लेकिन अधिक तापमान नुकसान पहुंचा रहा है। इस समय खेत में फलों की भरमार है। गर्मी से उनकी बेल के सूखने से छोटे आकार के ही फल पक रहे हैं। किसान सिंचाई कर रहे हैं तो दिन की गर्मी से तपे फल पानी के संपर्क में आने से सड़ रहे हैं। इस गर्मी के सामने सिंचाई से भी ज्यादा दिन तक नमी नहीं रख पा रही है।
गांव खड़िया निवासी किसान तेजपाल ने बताया कि उन्होंने बटाई पर पांच एकड़ में खरबूजा की फसल की है। लगभग 80 फीसदी फल पक चुके हैं, 20 फीसदी को पूरा आकार लेना है। लेकिन भीषण गर्मी से पत्ते और बेल झुलस गए हैं। सिंचाई करें तो फल सड़ने का डर है। नहीं करें तो गर्मी पौधों को सूखा देगी।
गांव खंदौली के किसान राहुल सिंह ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में तरबूजा, ककड़ी और खीरा की फसल की है। इस बढ़ते तापमान में सिंचाई भी फसलों को सूखने से नहीं रोक पा रही है। तरबूज के फलों में सड़न हो रही है। वहीं ककड़ी और खीरा की बेल को बचाए रखना चुनौती सी बन गई है।
तैयार फसल बेचें, भाव बढ़ने का न करें इंतजार
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि गर्मी अधिक है जो फल पक चुके हैं। उन्हें किसान जल्द से मंडी के लिए भेजें। भाव बढ़ने का इंतजार न करें। रात के समय सिंचाई करें। इससे खेत में भरा पानी गर्म नहीं होगा। फसलों को बचाने में राहत मिलेगी।