35 से कम उम्र में हो रहे नपुंसकता के शिकार
हुक्का की 40-45 मिनट की एक ट्रिप में 80-90 हजार मिलीग्राम धुआं (स्मॉक) अंदर पहुंचता है। इससे शुक्राणु तेजी से कम होने लगते हैं। नपुंसकता के शिकार ऐसे लोगों में 70 फीसदी की उम्र 35 से कम होती है। इनको दवा देने के साथ बेहतर खानपान फिटनेस की सलाह देते हैं। इनमें से 10-12 फीसदी को आईवीएफ की जरूरत पड़ती है।
खराब फिटनेस से भी बढ़ रही नपुंसकता
वरिष्ठ एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. अरुण तिवारी ने बताया कि नपुंसकता की बड़ी वजह बिगड़ा खानपान, दिनचर्या और खराब फिटनेस भी है। मरीज देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप में व्यस्त रहते हैं। खाने में दाल, हरी तरकारी, पौष्टिक आहार के मुकाबले फास्ट फूड-डिब्बा बंद खाना खा रहे हैं। काम भी बैठने का अधिक है। इससे मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग, यौन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। ओपीडी में आने वाले 60 फीसदी मरीजों में युवा हैं। स्वस्थ दिनचर्या, पौष्टिक आहार और व्यायाम से इससे बचा जा सकता है।
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तनाव, कलह भी पिता बनने में बाधक
जरू करें ये काम
- तंबाकू, पान मसाला, शराब, नशाखोरी, हुक्का आदि से परहेज करें।
- नियमित दो से तीन घंटे पैदल जरूर चलें, साइकिल चलाएं।
- अत्यधिक चिकनाई, तले भोजन और फास्ट फूड से बचें।
- लौकी, तोरई, पालक, गाजर समेत हरी सब्जी अधिक खाएं।
- लैपटॉप, मोबाइल का उपयोग सिर्फ जरूरत के लिए करें।
- देर रात सोने और जगने की आदत बदलें। जल्दी सोए-जागें।
- तनाव दूर करने को हॉबी पूरी करें, संगीत सुनें, पुराने मित्रों से बात साझा करें।