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सेना दिवस: हर जंग में लड़ा आगरा का यह गांव, युवाओं में फौजी बनने का जुनून

Tue, 15 Jan 2019 04:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाह (मथुरा)
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फौजी बनने के लिए दौड़ लगाते युवा - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के बाह में यमुना चंबल की बलिदानी माटी में आज भी सेना के अंकुर फूट रहे हैं। सेना दिवस की पूर्व बेला पर युवा पीढ़ी का जोश और जज्बा देखते ही बना। चंबल के किनारे बसे बाह के सिमराई गांव में सोमवार को यूथ बिग्रेड सड़क पर दौड़ती हुई मिली। पूछने पर बताया कि सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे है। 

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गांव के इंद्रजीत सिंह 11 मई 2010 में जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में तीन आतंकियों को ढेर कर शहीद हुए थे। रवि गुर्जर, सतेंद्र सिंह, अतेंद्र सिंह, सोनू गुर्जर ने बताया कि गांव में 120 घर हैं। हर घर ने सेना को अपना लाल दिया है। 42 रिटायर्ड सैनिक परिवार हैं। 44 अभी भी सेना में हैं। 

इंद्रजीत सिंह के भाई जयवीर सिंह ने पुंछ में चार आतंकियों को ढेर कर वीरता पुरस्कार जीता था। जयवीर सिंह ने बताया कि गांव के देवेंद्र, रंजीत, अजीत, जितेंद्र, मुन्नेश आदि आज भी पाक चीन बॉर्डर पर तैनात हैं। वायु सेना उप प्रमुख राकेश सिंह भदौरिया का गांव कोरथ, यहीं के नायब सूबेदार लायक सिंह कारगिल जंग में शहीद हुए थे।

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गांव के 200 लोग सेना में

गांव में कुल 200 घर है। 150 रिटायर्ड सैनिक चीन और पाकिस्तान के मोर्चे पर लडे़ हैं। अभी भी 200 लोग सेना में है। कैप्टन राम शंकर सिंह कहते हैं कि यहां बच्चों को शुरू से ही सेना मे भर्ती होने के लिए प्रेरित किया जाता है। वायु सेना उप प्रमुख राकेश सिंह भदौरिया से प्रेरणा लेकर अब गांव की युवा पीढ़ी एयरफोर्स के लिए भी तैयारी कर रही है।

हर जंग में लड़ा बाह का रूदमुली गांव

यमुना के बीहड़ में बसा बाह का पहले विश्वयुद्ध से लेकर कारगिल जंग तक बहादुरी का डंका बजा है। पहले विश्व युद्ध से शुरू हुई बलिदानी परंपरा का गवाह यहां का शहीद स्मारक है। पहले विश्वयुद्ध में यहां के 82 रणबांकुरों ने भाग लिया था, जिनमें चंद्रिका सिंह, मोहन सिंह, मुलायम सिंह, जनक सिंह, मदन लाल राजौरिया, कलियान सिंह शहीद हुए थे। 

दूसरे विश्वयुद्ध के मोर्चे पर गांव के 90 जवान गए थे। जिनमें से महावीर सिंह समेत 4 शहीद हुए थे। 1947-48 के कश्मीर युद्ध में 52 सैनिक शामिल हुए थे। तब कैप्टन जगवीर सिंह ने अपनी कुर्बानी दी। 1962 के चीन युद्ध में रघुवीर सिंह, 1965 के पाक युद्ध में कैप्टन बृजराज सिंह, 1971 के युद्ध में जसकरन सिंह शहीद हुए। 

कारगिल जंग समेत अन्य युद्धों में भी यहां के 50 से ज्यादा जवान शामिल हो चुके हैं। पाक चीन के खिलाफ बहादुरी से लडे़ जगतपाल सिंह ने बताया कि गांव में 170 घर हैं। 180 रिटायर्ड सैनिक हैं। अब भी 92 फौजी हैं। चीन और पाक के खिलाफ लड़ने वाले रुदमुली के रिटायर्ड सैनिक निहाल सिंह, सर्वजीत सिंह, जगतपाल सिंह आदि कहते हैं कि अब भी वह जरूरत पर देश के लिए लड़ने को तैयार हैं।
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