कासगंज। उत्तर भारत की प्रसिद्ध तीर्थनगरी सोरों को आधिकारिक रूप से तीर्थक्षेत्र का दर्जा दिलाने के लिए संयुक्त विकास मोर्चा का आंदोलन जारी है। रविवार को संयुक्त विकास मोर्चा के तत्वावधान में आंदोलनकारियों ने गांधी पार्क पर अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। कहा कि तीर्थनगरी को आधिकारिक दर्जा मिलने से पहले कोई भी शर्त मंजूर नहीं होगी।
रविवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भूपेश शर्मा के आह्वान पर तीर्थपुरोहित गांधी पार्क पर एकत्रित हुए और अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। सरकार को संदेश दिया कि पुरोहित अब मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शन करने वालों में सीताराम तिवारी, राधेश्याम वशिष्ठ, श्याम दीक्षित, कपिल पंडित, रामदास विश्वकर्मा, रोहित देवल, केशव मिश्रा, रिंकू पचौरी, गिरीश महेरे, राधारमण महेरे, राधेश्याम पसनावत, भदलू पंडित, संजय तिवारी, सचिन भारद्वाज, माधव तिवारी, प्रशांत वशिष्ठ मौजूद रहे।
यह बोले आंदोलनकारी
वर्ष 2018 में एटा की जनसभा में सोरों को मुख्यमंत्री ने तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की, लेकिन वे अपनी इस घोषणा पर खरे नहीं उतर पाए। मुख्यमंत्री को घोषणा पर अमल करना चाहिए। अभय राज मिश्रा
पौराणिक तीर्थस्थल सोरों ब्रज के सभी तीर्थों में सबसे प्राचीन है। इसके बाद भी सभी तीर्थों पर सरकार की कृपा बरस रही है। जबकि सूकरक्षेत्र उपेक्षित है। सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है। राधाकृष्ण तिवारी
प्रदेश के सभी हिंदू तीर्थों का योगी सरकार द्वारा विकास किया गया है। जबकि सनातन पौराणिक तीर्थ सोरों को छोड़ दिया गया है। जो अनुचित है। तीर्थ पुरोहित सरकार की यह नीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। रोहित भारद्वाज
जिस तीर्थ में लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष गंगास्नान के लिए आते हैं। मोक्ष की कामना के लिए पवित्र हरि की पौड़ी वराह कुंड में अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां विसर्जित करते हैं। उस तीर्थ के विकास की सरकार को सुध नहीं है। सार्थक मिश्रा