गिरोह राज्य के राजस्व को भारी क्षति पहुंचा रहा था और इसे नॉन जेन्युइन टैक्सपेयर (फर्जी करदाता) की श्रेणी में रखकर इनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो गिरफ्तार आरोपी इस गिरोह की एक कड़ी मात्र हैं। मुख्य सूत्रधारों और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
आगरा में जीएसटी चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों वसीम राजा, शाकिब और शोएब से हुई पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली की महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं। विभाग अब इस गिरोह के बाकी 20 सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के साथ मिलकर दबिश दे रहा है।
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राज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर चंद्रकांत रल्हन ने बताया कि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इन जालसाजों ने गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल कर फर्जी फर्में पंजीकृत करवाई थीं। इन कागजी फर्मों के जरिये बिना किसी वास्तविक व्यापार के केवल कागजों पर बिलों का लेन-देन किया जा रहा था, ताकि सरकार से अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त किया जा सके।
असिस्टेंट कमिश्नर ने जानकारी दी कि आरोपियों के पास से जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच में इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस के जरिये यह पुष्टि हुई है कि ये सभी फर्में एक ही केंद्र से संचालित हो रही थीं। उन्होंने बताया कि यह गिरोह राज्य के राजस्व को भारी क्षति पहुंचा रहा था और इसे नॉन जेन्युइन टैक्सपेयर (फर्जी करदाता) की श्रेणी में रखकर इनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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रल्हन ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपी इस गिरोह की एक कड़ी मात्र हैं। मुख्य सूत्रधारों और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग ने विस्तृत रिपोर्ट न्याय निर्णयन अधिकारी को भेज दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कर चोरी के इस नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही अन्य अभियुक्तों को भी हिरासत में लिया जाएगा।