आगरा में बेशकीमती जमीनों के फर्जी बैनामे यूं ही नहीं कर दिए गए। दलालों ने तहसीलकर्मियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में हेरफेर की। बैनामों पर मुहरों से लेकर फर्जी हस्ताक्षर तक कर दिए गए। एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई है। टीम अब फर्जी बैनामों को फाॅरेंसिक लैब भेज रही है।
इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों से भी हस्ताक्षरों का मिलान कराया जा रहा है, जिससे यह पता किया जा सके कि हस्ताक्षर मिलीभगत से किए गए, या फिर धोखे से करा लिए गए। जमीनों के फर्जी बैनामे करने वाले गिरोह पर पुलिस ने पिछले दिनों शिकंजा कसा था। चार मुकदमे दर्ज किए गए। 3 सदर तो 1 शाहगंज थाना में लिखा गया।
पुलिस ने तहसील के पूर्व रिकाॅर्ड कीपर सहित अन्य को जेल भेजा था। चारों मुकदमों की जांच एसआईटी कर रही है। टीम मास्टरमाइंड की तलाश में लगी है। उधर, एसआईटी की जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने में लगे हुए थे।
जिन जमीनों के मालिक सामने नहीं आते थे, उन जमीनों के फर्जी बैनामे तैयार कर लिए जाते थे। फर्जी मालिक-खरीदार बन जाते थे। बैनामा बनाने के बाद असली मालिक से सौदेबाजी करते थे। एसीपी सदर विनायक भोसले ने बताया कि एसआईटी फर्जी बैनामों पर लगाई गई मुहरों और हस्ताक्षरों की भी जांच कर रही है। फर्जी बैनामों और स्टांप पर लगीं मुहरें असली हैं तो इससे कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि हो जाएगी। इसमें अधिकारियों से अधिक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। बैनामों को जांचने और उन पर हस्ताक्षर कराने का काम कर्मचारियों का होता है।
उन्होंने ही अधिकारियों को धोखे में रखकर हस्ताक्षर कराए होंगे। वहीं अगर, हस्ताक्षर का मिलान नहीं हुआ तो माना जाएगा कि फर्जी तरीके से हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल किया गया। इसकी जांच विधि विज्ञान प्रयोगशााल में होगी।
तहसील में जांच करने पहुंची टीम
उधर, बुधवार को भी एसआईटी तहसील में जांच करने पहुंची। हालांकि रिकाॅर्ड रूम में नहीं गई। टीम के पहुंचने पर कर्मचारियों की धड़कन बढ़ गईं। टीम ने रिकाॅर्ड रूम में काम करने वाले युवकों के बारे में जानकारी ली। कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के पहुंचने की वजह से कई बाहरी युवक गायब है।