‘कला एक साधना है।’ यह कहते बहुत लोगों को सुना होगा। यह साबित कर दिखाया महाराष्ट्र के मूर्तिकार रविंद्र साल्वे ने। पत्नी के निधन के बाद भी वह डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित ‘सृजन-2017’ में हिस्सा लेने आए।
अपने भावों को पत्थर पर उकेरा, उसको ‘पुष्पांजलि’ नाम देकर पत्नी को समर्पित किया। बुधवार शाम पत्नी की तेरहवीं में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए। रविंद्र साल्वे ने काले पत्थर पर एक स्त्री का चेहरा बनाया है, उस पर फूल, पत्ती की भी आकृति है।
मूर्तिकार ने अपने आंसुओं को भी मूर्ति में लहर के रूप में प्रदर्शित किया है। सृजन-2017 का समापन सात अक्तूबर को होना है, पर रविंद्र साल्वे ने लगातार काम कर चार अक्तूबर को ही मूर्ति तैयार कर दी। छह अक्तूबर को पत्नी की तेरहवीं है, उसमें शामिल होने के लिए चले गए।