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आगरा: कोरोना काल की छूटी पढ़ाई, एक्स्ट्रा क्लास लगाकर विद्यालय कर रहे भरपाई

Thu, 24 Mar 2022 02:00 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

कोरोना काल में छात्रों की पढ़ाई का खूब नुकसान हुआ। हालांकि ऑनलाइन क्लास ने छात्रों को राहत जरूर दी, लेकिन संतोषजनक मूल्यांकन ना होने से उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा था। इस आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनके लर्निंग लॉस की भरपाई करने के लिए एक्स्ट्रा क्लास लगाई जा रही हैं।
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श्री रामकृष्ण इंटर कॉलेज में परीक्षा देते छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी में विद्यालय बंद रहने से ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, जो कि विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत कम समझ में आई। विद्यालय खुलने के बाद से विद्यार्थियों के लर्निंग लॉस की भरपाई अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर की जा रही हैं। विद्यालयों के प्रयास रंग ला रहा है, विद्यार्थियों का आत्मविश्वास परीक्षाओं के प्रति बढ़ रहा है। घरेलू परीक्षाएं विद्यालयों की ओर से ऑफलाइन कराई जा रही हैं, इसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति सराहनीय है। 98 से 99 फीसदी तक विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।
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श्री रामकृष्ण इंटर कॉलेज, खंदारी में बुधवार को कक्षा नौ के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा कराई जा रही थी। अच्छी बात यह थी कि पंजीकृत 137 में से सभी 137 विद्यार्थियों की उपस्थिति थी। परीक्षार्थियों ने बताया कि विद्यालय खुलने के बाद उनको पाठ्यक्रम पूरा करा दिया गया। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान जो भी टॉपिक समझ में नहीं आया था, उसे शिक्षकों ने अच्छे से समझा दिया, इससे परीक्षा देने में परेशानी नहीं हो रही है।

उत्साहपूर्वक दे रहे ऑफलाइन परीक्षा 

विद्यालय के प्रधानाचार्य सोमदेव सारस्वत ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों का संतोषजनक मूल्यांकन नहीं हो पाया। इस अवधि में विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी डगमगाने लगा। विद्यालय खुलने के बाद जो विद्यार्थी आर्थिक संकट की वजह से फीस नहीं दे पाए, उनकी भी मदद की गई। इसकी वजह से कोई विद्यार्थी चालू सत्र में ड्रॉपआउट नहीं हुआ। शिक्षकों ने अतिरिक्त कक्षाएं लेकर पाठ्यक्रम पूरा कराया। विद्यार्थी ऑफलाइन परीक्षा उत्साहपूर्वक दे रहे हैं।

विद्यालय ने की मदद

कक्षा नौ की छात्रा मुस्कान कुशवाह ने बताया कि  'मेरे पिता एक होटल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे, लॉक डाउन के समय उनकी नौकरी छूट गई। दूसरी नौकरी देर से मिली। इस दौरान स्कूल ने मदद की और कहा कि व्यवस्था होने पर ही फीस जमा करना।' वहीं सोनिया के पिता की भी लॉकडाउन में नौकरी चली गई थी। ऐसे विद्यार्थियों की विद्यालय ने मदद की। 
 

अभिभावकों का रोजगार जाने से 170 विद्यार्थी ड्रॉप आउट हुए

लॉकडाउन की वजह से रोजगार चले जाने से कक्षा नौ और 11 में पंजीकृत करीब 170 विद्यार्थियों ने अगली कक्षाओं में प्रवेश नहीं लिया, विद्यार्थी ड्रॉपआउट हो गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों से संपर्क किया तो कारण पता चला। विद्यालय खुलने के बाद विद्यार्थी आए तो उनकी मानसिक दशा ठीक नहीं थी, लगातार उनकी काउंसलिंग की गई। अतिरिक्त कक्षाएं लगवाकर पाठ्यक्रम पूरा कराया गया। नतीजा यह है कि 1995 में से करीब 98 फीसदी विद्यार्थी घरेलू परीक्षा में हिस्सा ले रहे हैं। - डॉ. यतेंद्र पाल सिंह, प्रधानाचार्य, आरबीएस इंटर कॉलेज

65 फीसदी विद्यार्थियों ने ही ऑनलाइन पढ़ाई की

ऑनलाइन पढ़ाई विद्यालय के 65 फीसदी विद्यार्थियों ने ही की। विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन नहीं था। विद्यालय खुलने पर विद्यार्थियों के लर्निंग लॉस को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई गईं। पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों का अभ्यास कराया गया। परीक्षा में अच्छा करने का विश्वास विद्यार्थियों में जागृत हुआ है। लॉक डाउन के बाद कुछ विद्यार्थी आर्थिक कारणों से पढ़ने नहीं आए, कुछ विद्यार्थियों को बुलाकर आर्थिक सहायता दी गई, अब वह पढ़ाई कर रहे हैं। - डॉ. अनिल कुमार वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, श्री रत्नमुनि जैन इंटर कॉलेज
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