आपके नौनिहाल जिन स्कूली वाहनों में सफर कर रहे हैं, वह खतरे से खाली नहीं हैं। न तो इनकी फिटनेस पूरी है और न ही इन्हें चलाने वाले चालक प्रशिक्षित हैं। वाहन चालक क्षमता से अधिक बच्चे ढोते हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार हादसा होने के बाद भी आरटीओ और यातायात विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में मंगलवार को मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने सख्ती दिखाते हुए अनफिट बसें चलाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने के निर्देश दिए थे। वहीं स्कूल बसों के अलावा शहरभर में बच्चों को स्कूल से घर और घर से स्कूल ले जाने के लिए कई ऑटो और वैन बेरोकटोक चल रहे हैं। हादसे होने पर कई बार बच्चों की जान पर बन आती है।
यह है नियम
स्कूल के बच्चों के लिए वैन चलाने का आरटीओ से परमिट लेना होता है। जिस स्कूल में वैन चलनी होती है, उससे एक पत्र भी लिखवाकर लाना होता है। इसके बाद ही परमिट जारी होता है। इसके अलावा वाहन में क्षमता के अनुसार ही बच्चे बैठा सकते हैं। आंकड़ों के मुताबिक शहरभर में करीब 1114 स्कूल बस और 158 वैन पंजीकृत हैं। वहीं 2600 से अधिक वैन और 457 से अधिक ऑटो अनधिकृत रूप से बच्चों को ले जाते हैं।
अभियान चलाकर होगी कार्रवाई
प्रवर्तन एआरटीओ आलोक कुमार ने बताया कि सितंबर माह में अभियान चलाकर बिना फिटनेस के दौड़ रहीं 32 स्कूल बसों के परमिट निरस्त किए हैं। इसके अलावा बच्चों को ले जाने पर कई ऑटो और वैन पर भी कार्रवाई की गई है। वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे ले जाने पर अभियान चलाकर कार्रवाई होगी।
केस-1
एक प्राइवेट स्कूल की वैन 2 जुलाई को नाले में गिर गई थी। वैन में 11 बच्चे सवार थे। लोगों न किसी तरह बच्चों को सुरक्षित निकाला। जो बच्चे घायल थे उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
केस-2
एक कान्वेंट स्कूल की वैन 18 अगस्त को संजय प्लेस मार्ग पर खड़ी कार से टकरा गई। आगे बैठे बच्चों को चोटें लगीं। मौजूद लोगों ने बच्चों को सुरक्षित निकाला।