सेंट फ्रांसिस स्कूल, घटिया आजम खां की ओर से कक्षा आठ के छात्र को एक करोड़ रुपये का लीगल नोटिस दिया गया है। 15 दिन के अंदर भुगतान करने पर प्रति माह एक फीसदी ब्याज के साथ रकम चुकाने की बात कही गई है। कारण यह है कि छात्र की ओर से वकील ने स्कूल को लीगल नोटिस भेजकर कक्षा आठ में फेल किए जाने का कारण पूछा था। साथ ही पैसे मांगे जाने का आरोप लगाया था।
न्यू आगरा के सुरेश नगर निवासी सगीर अहमद पेशे से मेकेनिक हैं। उनके बेटे मोहम्मद शहजान ने केजी से कक्षा आठ तक की पढ़ाई सेंट फ्रांसिस स्कूल से की है। कक्षा आठ की परीक्षा के परिणाम के आधार पर विद्यालय ने उसे कक्षोन्नति के लायक नहीं माना। इस पर सगीर अहमद ने मंडलीय उप शिक्षा निदेशक (जेडी) को प्रार्थना पत्र दिया। इसमें कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आठवीं तक के विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी उनके बेटे शहजान को कक्षा आठ में अनुत्तीर्ण कर दिया गया है।
जेडी ने शिकायत के आधार पर सेंट फ्रांसिस स्कूल से 11 अप्रैल 2016 को आख्या मांगी। जवाब न मिलने पर 20 अप्रैल को रिमाइंडर भेजा। वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल को छात्र की ओर से 18 अप्रैल को अधिवक्ता एडी सक्सेना ने लीगल नोटिस भेजा। छह मई को स्कूल ने अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार गुप्ता के माध्यम से जवाब में लीगल नोटिस छात्र को दिया। इसमें कहा गया है कि छात्र अवयस्क है, उसकी ओर से लीगल नोटिस नहीं दिया जा सकता है। सेंट फ्रांसिस स्कूल की साख है, यह ख्याति प्राप्त संस्था है। इस पर नोटिस के माध्यम से गलत आरोप लगाए गए हैं।
‘एक करोड़ रुपये का नोटिस स्कूल की ओर से मिला है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से आर्थिक सहायता की मांग करेंगे। मदद नहीं मिली तो भीख मांगेंगे। आरटीई के तहत आठवीं तक के बच्चों को फेल नहीं किया जा सकता, फिर भी बेटे को अनुत्तीर्ण कर दिया गया।’
- सगीर अहमद, शहजान के पिता
‘पहले छात्र की ओर से लीगल नोटिस स्कूल को दिया गया था। उसके जवाब में लीगल नोटिस स्कूल की ओर से दिया गया है। सेंट फ्रांसिस स्कूल अल्पसंख्यक संस्था है। इस पर शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू नहीं होता।’
- सिस्टर सेंटिना, सेंट फ्रांसिस स्कूल की प्रिंसिपल