क्षेत्र के ग्राम गढ़ी बल्देव के एक खेत में स्थित लगभग सौ साल पुराना और बीस साल से बंद कुआं पिछले दो दिन में अचानक पानी से लबालब भर गया। इतना कि पानी निकालने के लिए रस्सी की भी जरूरत नहीं है। कुएं पर आसपास के गांवों की भीड़ जुटने से मेला सा लग रहा है। हालांकि पानी मटमैला है। इसमें हल्की सी बदबू भी है। फिर भी लोग बीमारियां ठीक हो जाने की आस में इससे नहाने लगे हैं। भीड़ के कारण कोई हादसा न हो, इसलिए मंगलवार को वहां पुलिस भी डटी रही।
एक ओर भीषण गर्मी के मौसम में कुएं और सरकारी हैंडपंप सूख गए हैं। हर ओर पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में ग्राम गढ़ी बल्देव निवासी ठाकुर दास के खेत में स्थित सौ साल पुराने और लगभग 70 फुट गहरे कुएं में पानी आना चमत्कार माना जा रहा है। लगभग 20 साल से सूखे पड़े कुएं में ग्रामीण कूड़ा और मिट्टी डालते रहते थे। इसी कारण इसकी गहराई लगभग 30 फुट ही रह गई थी। इसमें दो दिन से पानी आने लगा। शुरू में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन मंगलवार को खेतों में काम करने वाले जब कुएं के पास पहुंचे तो पानी एकदम ऊपर तक भरा पाया। यह देख सब चौंक गए। खबर फैली तो आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग देखने आने लगे। इसे दैवी कृपा मानकर बड़ी संख्या में लोगों ने कुएं से पानी निकालकर बीमार और नेत्रहीन लोगों को नहलाना शुरू कर दिया। तमाम बर्तनों में भरकर घर ले जाने लगे। ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में जलस्तर 200 से 250 फुट है। खेतों में लगे नलकूप इतनी ही गहरी बोरिंग से पानी उठाते हैं। इस कारण कुएं का अचानक लबालब भर जाना आश्चर्य और चर्चा का विषय बना हुआ है।
दैवी चमत्कार नहीं
धरती के गर्भ में सूक्ष्म जलधाराएं होती हैं। आपस में मिलकर ये बड़ा जलस्रोत बनाती हैं। बोरिंग करने या फिर कुआं खोदने पर इसी प्रक्रिया से कुआं-नलकूपों में पानी आता है। संभव है कि ऐसी ही सूक्ष्म जलधाराएं आपस में मिली हों और सूखे कुएं में पानी आने लगा होगा।
- डा. प्रेमशंकर तिवारी, भूगोल विभाग, आरबीएस कालेज, आगरा।