मैनपुरी। बुखार से पीड़ित कक्षा तीन के छात्र की स्कूल वाहन से घर आते समय मौत हो गई। छात्र की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने विद्यालय प्रबंध तंत्र पर समय से सूचना न देने का आरोप लगाया है।
एलाऊ थाना क्षेत्र के गांव म्योरा चक निवासी श्रीचंद्र का 11 वर्षीय पुत्र आयुष कुमार भोगांव के आरएस ग्लोबल एकेडमी में कक्षा तीन का छात्र था। आयुष को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। शुक्रवार को सुबह वह स्वस्थ महसूस हुआ तो स्कूल पहुंच गया।
स्कूल में उसे तेज बुखार आया यहां किसी ने उसकी देखरेख नहीं की। आरोप है कि परिजनों को सूचना देने की जगह जब छुट्टी हुई तो स्कूल वाहन से उसे घर भेजा गया। घर जाते समय रास्ते में वह स्कूल वाहन में ही बेहोश होकर गिर गया। चालक और परिचालक ने इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को दी। विद्यालय के शिक्षक मौके पर पहुंचे और आयुष को सीएचसी भोगांव ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस पर शिक्षकों के हाथ-पैर फूल गए। छात्र के घर सूचना दी गई कि वे लोग जिला अस्पताल पहुंचें उनके बच्चे की हालत बहुत खराब है। परिजन और शिक्षक जब आयुष को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे यहां भी डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आयुष की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला अस्पताल पहुंच गए। श्रीचंद्र के दो बच्चे हैं ये बड़ा था।
आयुष के पिता श्रीचंद्र का रो-रोकर यही कहना था कि बच्चे को जब स्कूल में तेज बुखार आया था तो विद्यालय प्रबंधतंत्र को उसके घर सूचना देनी चाहिए थी। विद्यालय प्रशासन ने लापरवाही की है, जिससे उसके बच्चे को उपचार नहीं मिल पाया और उसकी स्कूल वाहन में ही मौत हो गई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक श्रीचंद्र ने कोई रिपोर्ट नहीं की थी।
छुट्टी के समय छात्र को अचानक बुखार आ गया। परिजनों को फोन किया, लेकिन उनका नंबर नहीं लगा। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन इस बीच उसकी मौत हो चुकी थी। छात्र की मौत से हमारे साथ ही पूरा विद्यालय परिवार आहत है।
-आशीष कुमार, निदेशक आरएस ग्लोबल एकेडमी
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डेंगू पीड़ित युवक ने दिल्ली में तोड़ा दम
मोहल्ला नगला निरंजन में डेंगू की चपेट में आए एक ही परिवार के पांच लोगों में से एक की दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में शुक्रवार देर रात मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग डेंगू से पीड़ित मरीजों को वायरल से पीड़ित ही मान रहा था। परिवार के एक अन्य सदस्य को भी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
नगला निरंजन में निवासी रामदयाल के परिवार के पांच लोग डेंगू की चपेट में हैं। निजी जांच केंद्र पर उनमें डेंगू की पुष्टि हुई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें डेंगू से पीड़ित मानने को तैयार नहीं था। तीन दिन पहले रामदयाल के 30 वर्षीय पुत्र अनिल कुमार की हालत बिगड़ी तो उसे मंगलवार को आगरा ले जाया गया। यहां से गुरुवार की रात हालत में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने दिल्ली रेफर कर दिया।
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में देर रात अनिल की मौत हो गई। जब यह समाचार गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। देर शाम उसके भाई उपदेश की पत्नी नीरज को भी गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग उसे भी डेंगू मानने से इन्कार कर रहा है। नगला निरंजन में आधा सैकड़ा लोग बुखार की चपेट मे हैं,
लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विभागीय अधिकारी जहां टीम भेजकर उपचार कराने का अब तक दावा कर रहे थे वहीं अब वे पीड़ितों के बारे में जानकारी होने से भी मना कर रहे हैं। टीम में शामिल डॉ. वाईपी दुबे से जब बात की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से साफ मना कर दिया।