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सीवर चार्ज तक डकार गए अधिकारी

Sun, 24 Jan 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
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केस-1
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द्रोपदी देवी का कमला नगर में घर है। जल संस्थान के वर्ष 2014-15 के बिल में सीवर चार्ज शून्य दिखाया गया। वाटर चार्ज भी न के बराबर है। सिर्फ वाटर टैक्स के आधार पर ही पूरा बिल वसूला किया गया है।
केस-2
नर्मदा परिहार कमला नगर निवासी हैं। जलसंस्थान के वर्ष 2014-15 के बिल में भी सीवर चार्ज नहीं जोड़ा गया है। वाटर चार्ज भी नहीं। सिर्फ वाटर टैक्स ही जोड़ा गया है। इसी आधार पर उन्होंने इस वित्तीय वर्ष का बिल जमा किया है।
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केस-3
सुरेश चंद्र पालीवाल का कमला नगर में घर है। जलसंस्थान के वर्ष 2014-15 के बिल में सीवर चार्ज नहीं जोड़ा गया। जलकर के बिल में सीवर चार्ज शून्य दिखाया गया है। वाटर टैक्स के हिसाब से ही बिल बनाया है। जल संस्थान ऐसे ही कंगाल नहीं हुआ। सालों से यहां घोटाले हो रहे हैं। बिलों में हेरफेर कर अब तक लाखों रुपये का चूना लगाया चुका है। वाटर चार्ज के साथ-साथ सीवर चार्ज में भी गोलमाल किया गया है। वह भी उन क्षेत्रों में जहां सीवर चार्ज की वसूली अनिवार्य स्थिति में है।
शहर के सीवर ऐसे ही नहीं उफन रहे। जिस जल संस्थान पर इनको साफ रखने की जिम्मेदारी है, वहां के कुछ अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ जेबें भरने पर ध्यान दे रहे हैं। सीवर चार्ज के कम से कम 530 रुपये तक का गोलमाल हो रहा है। ये दो मामले तो उदाहरण बतौर हैं। ऐसे तमाम मामले हैं, जिनके कागजों में हेरफेर कर घर के टॉयलेट को बंद दिखाकर इस चार्ज को ही खत्म कर दिया। सालों से यह खेल चल रहा है। सूत्रों की मानें तो अब तक लाखों रुपये का खेल चुका है।
नहीं हटाया जा सकता है सीवर चार्ज
शहर की पॉश कालोनियों में से एक कमला नगर आवास विकास परिषद द्वारा विकसित की गई कॉलोनी है। नियमानुसार, इस क्षेत्र में सीवेज की लाइन पड़ी हुई है। लोगों को घरों में सेप्टिक टैंक बनाने की अनुमति नहीं है। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र के किसी भी भवन के जलकर बिल में सीवर चार्ज नहीं हटाया जा सकता। प्रत्येक घर में कम से कम एक टॉयलेट में एक सीट होगी। मगर, कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर इस क्षेत्र के अधिकांश घरों से सीवर चार्ज ही खत्म कर दिया है। ऐसा ही आवास विकास सेक्टरों में बने भवनों में है। बता दें कि नियम के मुताबिक जल संस्थान प्रत्येक घर से 530 रुपये प्रति टॉयलेट सीट चार्ज करता है।
रिपोर्टों का सहारा
दरअसल, बिलों के हेरफेर में गर्दन फंसने से बचाने के भी पूरे इंतजाम कर लिए हैं। संशोधित बिल को जमा कराने के साथ ही गृह स्वामी से एक प्रार्थना पत्र लिखवा लिया जाता है कि घर बंद है, इसमें कोई निवास नहीं करता। अत: सीवर कनेक्शन की जरूरत ही नहीं है। ऐसा ही वाटर चार्ज में खेल में पानी न आने या फिर सबमर्सिबल से पानी प्रयोग में लेने के संबंध में प्रार्थना पत्र लिखवाकर फाइल में लगा दिया जाता है।   
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खुलासे की जांच के आदेश
जलकर के वाटर चार्ज में गड़बड़ी के खुलासे के बाद जल संस्थान में हड़कंप मच गया है। महाप्रबंधक मंजू गुप्ता ने अधीनस्थ अधिकारियों को पुरानी फाइलें खंगालने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उनसे जल्द ही रिपोर्ट तलब की है। मंजू गुप्ता का कहना है कि अगर किसी का वाटर चार्ज हटाया गया है तो उसकी कोई कंडीशन होगी, इसमें घोटाला नहीं है। फिर भी मामले की जांच कराई जा रही है।
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