मैनपुरी। विकास खंड करहल की ग्राम पंचायत ओन्हा में प्रधान और सचिव ने लाखों का फर्जीवाड़ा कर डाला। शिकायत के बाद जांच हुई तो पूरा मामला सामने आ गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने प्रधान को पंचायत राज अधिनियम की धारा 95जी के तहत नोटिस जारी किया है।
ग्राम पंचायत ओन्हा में प्रधान के फर्जीवाड़ा करने की शिकायत डीएम से की गई थी। शिकायत पर सीडीओ ने संज्ञान लेते हुए भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह को जांच सौंपी थी। जांच में करीब चार लाख का घोटाला सामने आया, जबकि कई बिंदुओं पर जांच पूरी नहीं हो सकी। जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम प्रधान और सचिव ने जहां चार फर्जी नामों से शौचालय निर्माण के लिए 48 हजार रुपये निकाले गए तो वहीं 13 अन्य शौचालयों के भी 1.56 लाख रुपये का घोटाला किया गया। इतना ही नहीं पूर्व प्रधान के बनवाए गए चकमार्ग को दोबारा बना हुआ दिखाकर 1.30 लाख रुपये की गड़बड़ कर दी। इसके अलावा डस्टबिन के नाम पर भी 48 हजार रुपये निकाले गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार करीब चार लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया। वहीं कई बिंदुओं पर जांच नहीं की जा सकी। जांच रिपोर्ट आने के बाद सीडीओ नगेंद्र शर्मा ने प्रधान बादामश्री के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके आधार पर डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने पंचायती राज अधिनियम की धारा 95जी के तहत नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है।
अभिलेख न देने से पूरी नहीं हुई जांच
ग्राम पंचायत ओन्हा में जांच करना आसान नहीं था। कई बार पत्र भेजने और कहने के बाद भी जांच अधिकारी विजय सिंह को कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसे में मजबूरन फिर उन्हें शिकायती पत्र से ही जांच करनी पड़ी। शिकायत में कई बिंदुओं पर अभिलेख न होने के चलते जांच नहीं हो सकी।
मनरेगा कार्यों का कैसे हो सत्यापन
शिकायत में कई मनरेगा कार्यों में भी घोटाले की भी शिकायत की गई थी। जब जांच अधिकारी गांव पहुंचे तो कार्यों का सत्यापन नहीं हो सका। जांच अधिकारी का कहना था कि मनरेगा द्वारा सभी कार्य मिट्टी के कराए जाते हैं। ऐसे में कई साल बीतने के बाद इन कार्यों का सत्यापन संभव नहीं है।
वर्जन
ओन्हा के ग्राम प्रधान द्वारा अनियमितताएं करने का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने धारा 95जी के तहत कार्रवाई की है। जवाब आने के बाद अधिकार सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।