मैनपुरी। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में हुए सफाईकर्मी वेतन घोटाले की जांच दोबारा होगी। तीन सदस्यीय जांच समिति ने और अधिक गबन होने की आशंका जताई थी। मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी ने सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।
पंचायत राज विभाग के अनुसार वर्ष 2017 से 2020 के बीच कार्यालय में तैनात सफाईकर्मचारी कुलभूषण सिंह ने सफाईकर्मियों के वेतन की राशि अपने और पत्नी के खाते में डाल ली थी। मामले की प्राथमिक जांच के बाद मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे। जांच में परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ कोषाधिकारी श्यामलाल जायसवाल और उपायुक्त मनरेगा रंजीत सिंह को शामिल किया गया था।
मामले में समिति ने जांच कर 32 लाख रुपये के फर्जीवाड़े की रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी थी। साथ ही रिपोर्ट में ये आशंका भी जताई थी कि पूर्व के बिलों की जांच करने पर और भी मामला सामने आ सकता है। इस पर डीपीआरओ को खुद जांच कराने के लिए कहा था। मामले में डीपीआरओ स्वामीदीन ने दोबारा जांच के लिए एडीपीआरओ रोहित कुमार को नामित किया है। उन्होंने वर्ष 2017 से पूर्व से लेकर वर्तमान तक के बैंक अभिलेखों और सफाईकर्मी के वेतन बिलों की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
आरोपी सफाईकर्मी ने डीएम को लिखा पत्र
पूरे मामले में सफाईकर्मी कुलभूषण सिंह को दोषी मानकर कार्रवाई की जा रही है। रविवार को कुलभूषण ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर बताया कि कार्यालय के कुछ लिपिकों के कहने पर उसने अपना और पत्नी का खाता पोर्टल पर फीड किया था। मामला खुलने के बाद भी लिपिकों ने उससे गलत शपथ पत्र बनवाने के साथ ही दबाव भी डाला था।
उसने पूर्व जांच में 17 लाख रुपये का मामला सामने आने की बात कही है। इसके स्थान पर लिपिकों द्वारा 24 लाख रुपये जमा कराने का भी आरोप लगाया है। कुलभूषण ने जिलाधिकारी से मांग की है कि बकाया धनराशि की वसूली लिपिकों से की जाए। साथ ही उस पर दर्ज कराई गई एफआईआर वापस कराई जाए। हालांकि पत्र में किसी भी लिपिक का नाम नहीं खोला गया है।
मामला संज्ञान में आने पर तीन सदस्यीय समिति को जांच के आदेश दिए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी को कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। जो भी दोषी होगा वह बच नहीं सकेगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।