कासगंज। ग्राम पंचायतों की स्वच्छता समितियों ने साफ-सफाई के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला कर लिया। बार-बार मांगने के बावजूद भी ग्राम पंचायतें स्वच्छता समितियों के खातों का ब्योरा उपलब्ध नहीं करा रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए जांच शुरू कराई है।
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो समितियां बनाई जाती हैं। एक समिति में एएनएम और ग्राम प्रधान का संयुक्त खाता होता है और दूसरी समिति का खाता ग्राम पंचायत की आशा सचिव व ग्राम प्रधान का होता है। इन खातों में हर साल स्वच्छता के लिए अलग-अलग धनराशि भेजी जाती है, लेकिन धरातल पर धनराशि से स्वच्छता के काम दिखाई नहीं देते। कई बार मिली शिकायतों पर डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने सभी ग्राम पंचायतों के खातों का ऑडिट शुरू कराया। एक माह से ऑडिट की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन ग्राम पंचायतें खातों का ब्योरा नहीं दे रहीं। स्वास्थ्य विभाग ने माना है कि ग्राम पंचायतों ने सफाई के नाम पर कहीं न कहीं घोटाला किया है। यह वित्तीय अनियमितता है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्राम प्रधानों, एएनएम और आशा सचिवों को फिर से नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
कई जगह सामने आए विवाद
कासगंज। कई ग्राम पंचायतों में विवाद सामने आ रहे हैं। कहीं ग्राम प्रधानों का आरोप है कि आशा सचिव सहयोग नहीं करतीं। चेक पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी करतीं हैं। वहीं कई जगह आशा सचिवों ने प्रधानों पर मनमानी का आरोप लगाया है। कुछ ग्राम पंचायतों में एएनएम और ग्राम प्रधानों के विवाद सामने आए हैं।
आंकड़े की नजर से-
- 10 हजार रुपये एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में जाते हैं हर साल।
- 10 से 30 हजार रुपये आशा सचिव और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में भेजे जाते हैं।
- 50 लाख रुपये से अधिक का प्रथम दृष्टया माना जा रहा है गोलमाल।
- 423 ग्राम पंचायतों का किया जा रहा ऑडिट।
- ग्राम पंचायतों से स्वच्छता समिति के खातों का ब्योरा मांगा है। लंबे समय से ग्राम पंचायतें ब्यौरा उपलब्ध नहीं करा रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग सभी ग्राम पंचायतों के खातों का ऑडिट कर रहा है। ऑडिट रिपोर्ट के अध्ययन के बाद कार्रवाई सुनिश्चित होगी। इस पूरी प्रक्रिया में 8 से 10 दिन का समय लग सकता है। प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ।