मैनपुरी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चेत कैंपस में स्थित अपनी मुख्य शाखा के किराया विवाद का निस्तारण हो गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एसबीआई मुख्य शाखा के विवाद में आदेश जारी किया है कि संपत्ति स्वामी को किराए की रकम का भुगतान ब्याज सहित 30 कार्यदिवस में किया जाए। यह विवाद 11 साल से चला आ रहा था।
बता दें कि वर्ष 1951 में प्रदेश में लखनऊ, कानपुर के बाद एसबीआई ने तीसरी शाखा मैनपुरी में चेत कैंपस में ही खोली थी। वादी हर्ष चेत और प्रफुल चेत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में 4 सितंबर 2024 को वाद दाखिल किया था। आरोप था कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मैनपुरी मुख्य शाखा स्टेशन रोड स्थित इनकी संपत्ति पर 1951 से संचालित है। 2013 में बैंक ने मुख्य शाखा को वहां से बंद कर दिया। परंतु संपत्ति पर कब्जा करे रहे और भवन में अपना सामान रखकर ताला लगा दिया। जबकि जून 2013 तक का ही किराया अदा किया। इसके बाद किराया भी देना बंद कर दिया।
आरोप यह भी था कि 1999 में बैंक को मुख्य शाखा को सीबीएस में तब्दील कराया। उस वक्त भवन का मरम्मतीकरण और नवीनीकरण कराया गया। इसके लिए एसबीआई ने ही वादीगण को 8.43 लाख रुपये का बैंक लोन 15.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि ब्याज दर से लोन दिया था। भवन नवीनीकरण की एवज में प्रतिमाह 10345 रुपये किराए में बढ़ोतरी की थी। यह भी तय था कि हर वर्ष 25 फीसदी की बढ़ोतरी किराए की राशि में की जाएगी। मगर, जब बैंक ने शाखा को 2013 में बंद किया उस वक्त बैंक पर 23.40 लाख रुपये बैंक पर बकाया थे। इसमें से ऋण खाता मात्र 469000 रुपये में समाप्त कर अदेय प्रमाण पत्र जारी कर दिया। 23.40 लाख रुपये में बची बकाया किराया की धनराशि 1924469 रुपये का भुगतान नहीं किया। दावा के आधार पर प्राधिकरण की ओर से बैंक को नोटिस जारी हुए। बैंक ने अपना जवाब रखा गया। दोनों पक्षों को सुनने व सुलहनामा के आधार पर अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आदेश दिया गया है कि बैंक वादी हर्ष चेत और उनके भाई प्रफुल्ल चेत को बकाया 1924469 रुपये 15.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि ब्याज दर के साथ 30 कार्यदिवस में अदा करें।