घरों में बनाई जा रही आधुनिक रसोई और उसमें लगने वाली छौंक महिलाओं को बीमार कर रही है। महिलाएं चिड़चिड़ी हो रही हैं और वे फेफड़े के कैंसर की चपेट में आ रही हैं। बॉयोमेडिकल रिसर्च सेंटर, ग्वालियर के निदेशक डॉ. संत कुमार भटनागर ने बुधवार को होटल क्लार्क्स शीराज में सेंट जोंस कॉलेज की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अपना सर्वे साझा किया।
‘रिसेंट एडवांसेज इन एन्वायरमेंटल प्रोटेक्शन’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. संत कुमार भटनागर ने बताया कि उन्होंने 3,000 घरों और 3,00,000 कैंसर मरीजों पर काम किया है। यह पाया कि घरों में रसोई व्यवस्थित न होने से बीमारी पैदा हो रही है। खासतौर पर जिस रसोई में एग्जॉस्ट नहीं लगा है।
रसोई में मौजूद चार कारक कैंसर की स्थिति उत्पन्न करते हैं। गैस, टाइल्स, गीला वेस्ट मैटेरियल और गैस चूल्हा ऊंचाई पर (नाक के नजदीक) रखना। गैस जलाते ही रसोई का तापमान बढ़ जाता है। गैस कार्बनिक कंपाउंड होता है, जो हाईप्रेशर पर बना होता है।
छौंक लगाना भी है खतरनाक
डॉ. संत कुमार भटनागर
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रसोई का तापमान 22-23 डिग्री सेंटीग्रेड से बढ़कर 35 से 40 डिग्री सेंटीग्रेड हो जाता है। प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया। इससे निकलने वाली गर्मी ने नमी बनाई, उस नमी से रसोई का वातावरण कैंसर कारक बन जाता है।
कुकर में दाल उबलने के बाद प्याज और लहसुन का छौंका लगाते हैं, तेल का तापमान 150 डिग्री सेंटीग्रेड होता है। इतने उच्च तापमान पर प्याज डालने पर पॉलिसाइक्लिक एयरोमेट्रिक हाइड्रोकार्बन बनाता है। छौंक को दाल में डालने पर तापक्रम 80 डिग्री सेंटीग्रेड हो जाता है।
डॉ. संत कुमार भटनागर का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। यह कानून बनाने की मांग की है कि हर रसोई में एग्जॉस्ट लगाना अनिवार्य हो।
डॉक्टर ने दिया ये सुझाव
डॉ. संत कुमार भटनागर का कहना है कि हमारा शरीर 33 से 35 डिग्री तापमान को आसानी से झेलता है, इतने उच्च तापमान को शरीर झेल नहीं पाता। इससे चिड़चिड़ाहट होती है। रोजाना ऐसा करने पर लगातार चिड़चिड़ापन बढ़ने से सूंघने की क्षमता कम हो जाती है। इससे जुकाम होता है। आगे चलकर कफ बनता है।
यदि महिला गर्भवती है तो उसके पेट में पलने वाले बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डॉ. संत कुमार ने सुझाव दिया कि लगातार एक ही महिला रसोई में खाना न पकाए। परिवार के बाकी सदस्य भी सहयोग करें। एग्जॉस्ट जरूर हो। चमकदार टाइल्स की जगह नेचुरल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे रसोई का ताप कम रहे।