आगरा में थाना पिढ़ौरा के गांव जोर में 6 दिन पूर्व सर्पदंश से झगोली वाली माता मंदिर पर रहने वाले संत राघवानंद की मौत हो गई थी। उनका शव मंदिर परिसर के पास ही दफना दिया गया था। शुक्रवार की सुबह राजस्थान के एक संत के साथ परिजन व अन्य लोग पहुंचे। संत के जिंदा होने का सपना आना बताकर दफन किए गए शव को निकालने की कोशिश करने लगे। जानकारी होने पर सीओ पिनाहट पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे और लोगों को समझाकर समाधि की खुदाई नहीं करने दी।
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पुलिस के मुताबिक संत राघवानंद 31 जुलाई को जोर गांव में निकले सांप को पकड़ने गए थे। वहीं सर्पदंश से उनकी मौत हो गई थी। शव को मंदिर परिसर के पास ही लोगों ने दफन कर दिया था। 6 दिन बाद शुक्रवार को संत के पिता जसपाल सिंह उर्फ प्रकाशानंद अन्य परिजन, सुंदरगढ़, राजस्थान स्थित शक्ति आश्रम के संत संतोष ब्रह्मचारी और अनुयायियों के साथ आश्रम पर पहुंचे।
लोग संत को समाधि से निकालने का प्रयास करने लगे, तो गांववालों की भी भीड़ जुट गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समाधि खुदाई करने की अनुमति नहीं दी। पिता ने लोगों को बताया कि दो दिन पूर्व उन्हें राघवानंद ने सपने में आकर कहा था कि वे अभी जिंदा हैं। उन्हें मृत समझकर लोगों ने जमीन में दफना दिया है। सीओ पिनाहट अमरदीप पाल ने बताया कि बिना अनुमति के खुदाई नहीं कर सकते हैं। मौके पर उन्होंने पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। हालांकि देर शाम तक लोग मौजूद रहे।