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वाराणसी के इस विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्र लगाने वाले शिक्षकों की होगी जांच, मची खलबली

Wed, 20 Nov 2019 01:40 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का प्रमाणपत्र लगाकर परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति पाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाओं की भी जांच की जाएगी। विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने इनके प्रामणपत्रों की सत्यापित रिपोर्ट व अन्य जानकारियां मांगी हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) और बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा है।
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एसआईटी डॉ. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन में अनियमितता की जांच कर रही है। जांच की कड़ी में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध विद्यालय में पूर्व मध्यमा, उच्चतर मध्यमा, शास्त्री एवं शिक्षा शास्त्री (बीएड) में वर्ष 2004 से 2014 तक चयनित अध्यापकों के संबंध में जानकारी मांगी गई है।

अपर पुलिस अधीक्षक, एसआईटी, लखनऊ अमृता मिश्रा ने एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है। 15 नवंबर को पत्र जारी किया गया है। डायट प्राचार्य अहिबरन सिंह का कहना है कि एसआईटी के अधिकारी का पत्र प्राप्त हुआ है। एक दो दिन में जांच कराकर रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
ये जानकारी उपलब्ध करानी है
- चयनित अभ्यर्थियों की सूची (नाम, पिता का नाम व पता, संबंधित विद्यालय का नाम)
- चयनित परीक्षा का नाम व तिथि। 
- संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के डिग्री धारक चयनित अभ्यर्थियों की सत्यापन रिपोर्ट।
- यदि शिक्षक का प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया तो उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण।

दो जांचें विभाग में पहले से लंबित
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी एवं टेंपर्ड प्रमाणपत्र लगाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है। एसआईटी की सूची के आधार पर जिले में 241 शिक्षक वर्ष 2017 में ही तलाशे गए थे। जनवरी 2019 में दोबारा सूची जारी गई है। 30 जनवरी तक कार्रवाई होनी थी, अभी तक 241 में से महज 52 शिक्षकों को तीसरा नोटिस दिया गया है।

बीएसए कार्यालय में आठ अक्तूबर की रात आग लगने के बाद से बीएसए कार्यालय बंद है, जांच रुकी हुई है। इसी के साथ वर्ष 2010 व उसके बाद के वर्षों में हुई फर्जी नियुक्तियों की जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।

 
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शिक्षकों के रिकॉर्ड जांच कमेटी को नहीं मिल पाए हैं। बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया था तो कार्यालय बंद मिला। जांचों से संबंधित फाइलें उसी में हैं। फाइलें देखने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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