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आगरा में पकड़े गए थे 16 रोहिंग्या मुस्लिम, जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

Tue, 09 Oct 2018 11:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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थाने में बैठे पकड़े गए रोहिंग्या मुस्लिम - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के फोर्ट रेलवे स्टेशन से पकड़े गए सभी रोहिंग्या मुस्लिमों के शरणार्थी कार्ड में एक बात खुफिया एजेंसियों को चौंका रही है। यह है उनकी जन्मतिथि। चाहे पांच साल का बच्चा हो या 70 साल का बुजुर्ग, सबके जन्म की तारीख एक जनवरी है। पुरुष हो या महिला, जन्मतिथि में फर्क है तो सिर्फ साल का। सभी साल के पहले दिन जन्मे हैं।
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खुफिया एजेंसियों ने इनके कार्ड की फोटो कॉपी यूनाइटेड नेशन हाई कमीशन फोर रिफ्यूजी ( यूएनएचसीआर) के दिल्ली स्थित दफ्तर भेज दिए हैं। वहां से सत्यापन रिपोर्ट आने का इंतजार है। इन सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया गया है।

कोलकाता से रोहिंग्या के तीन परिवार आए हैं। इनमें 16 सदस्य हैं। ये सभी रुनकता में ठहरे हैं। यहां पहले से 12 रोहिंग्या परिवार रह रहे हैं। इन्हें दो साल से ज्यादा हो गए हैं। सभी कूड़ा बीनने का काम करते हैं। सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहते हैं। 
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खुफिया पुलिस के सूत्रों ने बताया कि बाहर से आए रोहिंग्या को छोड़ भले ही दिया गया है लेकिन पूरी तरह से क्लीनचिट नहीं दी गई है। अभी यह तस्दीक किया जा रहा है कि इन्हें आने का जो मकसद बताया है, वह सही है या नहीं।

इन्होंने कहा था कि कोलकाता में कबाड़ का काम ठप हो गया, इस कारण आए हैं। इस बारे में कोलकाता पुलिस से भी जानकारी की जा रही है। रोहिंग्या से आए मुस्लिमों में कुल्लू मियां की जन्मतिथि एक जनवरी, 1961 है। 

उसका शरणार्थी कार्ड 31 मार्च, 2017 को जारी किया गया। यह 30 मार्च, 2019 तक मान्य है। परमिना अख्तर की जन्मतिथि एक जनवरी, 1994 है। इनका कार्ड 20 मार्च, 2018 को जारी किया गया। यह 19 मार्च, 2020 तक के लिए मान्य है। 
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सभी की जन्मतिथि एक

नसीमा की जन्मतिथि एक जनवरी, 1971 है। बाबुल की जन्मतिथि एक जनवरी, 2002 है। महाबू की एक जनवरी, 1989 है। इन लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि यह जन्मतिथि कैसे कार्ड पर आई? उन्हें तो जन्मतिथि याद ही नहीं है। कार्ड बनते समय केवल जन्म का साल बताया था। इनका बयान इसलिए चौंका रहा है क्योंकि कार्ड अलग-अलग समय पर बने हैं।

बांग्लादेशियों की भी शुरू हुई तलाश

अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की भी खुफिया पुलिस ने तलाश शुरू की है। शहर में कई बस्तियों के बारे में कहा जाता है कि यहां बांग्लादेश से
आए लोग रह रहे हैं। एत्माद्दौला में ऐसी कई बस्तियां हैं। रुनकता में भी रोहिंग्याओं की बस्ती के पास ही बांग्लादेशी रहते हैं।
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