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रुपयों के लिए मुर्दे का इलाज करते रहे डॉक्टर, परिजनों ने किया हंगामा तो शव छोड़कर भागे

Tue, 09 Oct 2018 10:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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डॉक्टर
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आगरा के एक निजी अस्पताल में रुपयों के लिए डॉक्टर एक मुर्दे का इलाज करते रहे। मरीज की मौत के बाद भी उसका शव वेंटीलेटर पर रखा रहा। परिजनों को जब पता चला तो हंगामा कर दिया। इसके बाद अस्पताल स्टाफ शव छोड़कर भाग गया। पीड़ित परिवार ने थाने में तहरीर दी है।
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राजस्थान के धौलपुर निवासी 60 साल की मीरा देवी को बुखार के अलावा सांस की परेशानी थी। इनका इलाज धौलपुर के अस्पताल में चल रहा था। यहां राहत न मिलने पर संचालक ने सुल्तान गंज पुलिया स्थित अस्पताल में मरीज को भर्ती कराया। 

संचालक ने 48 घंटे में मरीज को ठीक करने का दावा करते हुए 70 हजार रुपये जमा करा लिए। परिजनों का आरोप है कि रविवार की दोपहर को मरीज की हालत खराब बताते हुए वेंटीलेटर पर रख दिया। हृदय संबंधी परेशानी भी बताई। 15 हजार रुपये और जमा कराए। मरीज से मिलने भी नहीं दिया। 
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पहले ही हो चुकी थी मरीज की मौत

चार घंटे के गुजरने के बाद परिजनों ने जबरन मरीज को देखा। परिजनों का आरोप है कि वेंटीलेटर पर मरीज की मौत हो चुकी थी। पैसे के लिए शव को वेंटीलेटर पर रखे हुए थे। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। ये देख स्टाफ और संचालक शव को छोड़कर भाग गया। 

सूचना पर पुलिस आई और परिजनों को शांत कराया। पुलिस के आने के बाद संचालक भी आ गया। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि अस्पचाल संचालक स्नातक पास है, उसके पास कोई चिकित्सकीय डिग्री नहीं है। अस्पताल का पंजीकरण भी नहीं दिखा पाया। इलाज किसने किया तो उसने किसी विशेषज्ञ चिकित्सक का नाम बताया। परिजनों ने पुलिस को तहरीर दी है। 

सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि मंगलवार को टीम भेजकर अस्पताल के पंजीकरण और मरीज का इलाज किसने किया, इसकी जांच की जाएगी।   उधर, हरीपर्वत थाना के इंस्पेक्टर का कहना है कि सीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि केस दर्ज किया जाए या नहीं।

पूर्व में चलाता था अवैध अस्पताल

आरोपी संचालक पत्नी के साथ पूर्व में भी नेहरू नगर में अवैध अस्पताल चलाता था। एक ही इमारत में दो अस्पतालों के बोर्ड लगे हुए थे। इसने स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया था। स्वास्थ्य विभाग तक शिकायत पहुंचने के बाद अस्पताल बंद कराया। इसकी संचालिका के खिलाफ अवैध अस्पताल चलाने में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुकदमा भी दर्ज है।
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