10एमएनपी-27-समान पक्षी विहार में पक्षियों की गणना के लिए पहुंचे राज्य समन्वयक टीके रॉय
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी/किशनी। समान पक्षी विहार से मेहमान परिंदे मुंह मोड़ने लगे हैं। कहीं न कहीं इसके विहार के संरक्षण में कमी एक बड़ा कारण है। शुक्रवार को एशियन वाटर बर्ड सेंसस के लिए समान पक्षी विहार पहुंची टीम की गणना में इसका खुलासा हुआ। हालांकि प्रदेश की अन्य झीलों की तुलना में टीम ने संख्या को अधिक माना है।
इंटरनेशनल वेटलैंड्स संस्था द्वारा विश्व के 27 देशों में प्रत्येक वर्ष वाटर बर्ड सेंसस कराई जाती है। चार जनवरी से 19 जनवरी के बीच होने वाली इस गणना को वैश्विक स्तर पर परखा जाता है। शुक्रवार को संस्था की ओर से राज्य समन्वयक टीके रॉय अपनी टीम के साथ समान पक्षी विहार पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रदेश की तीन झीलों को इस गणना में शामिल किया जाता है। इसमें कीठम झील आगरा, पटना झील जलेसर और समान पक्षी विहार शामिल है। इन सभी में समान पक्षी विहार सर्वाधिक 526 हेक्टेयर में फैला हुआ है।
राज्य समन्वयक टीके रॉय ने यंत्रों व फोटोग्राफी के माध्यम से पक्षियों की गणना की। गणना में पता चला कि इस साल झील में 45 प्रजातियों के 4005 पक्षी ही आए हैं। इसमें 20 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां शामिल हैं। ये संख्या बीते वर्ष की अपेक्षा काफी कम है। बीते वर्ष गणना में 46 प्रजातियों के 4828 पक्षी आए थे। उन्होंने संख्या घटने के पीछे वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने समान पक्षी विहार को विकसित करने के के लिए कहा। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा खेती किए जाने व कीटनाशी के प्रयोग से पक्षियों को समस्या आती है। इसमें प्रशासन को सुधार की जरूरत है।
समान में दिखीं रेड लिस्टेड प्रजातियां
सेंसस के लिए आई टीम ने बताया कि दुनिया भर में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर द्वारा वाटर बर्ड की सात प्रजातियों को रेड लिस्टेड किया गया है। क्योंकि ये प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। लेकिन समान पक्षी विहार में गणना के दौरान रेड लिस्टेड प्रजातियों के पक्षी भी नजर आए। इसमें ब्लेक हैडेड आईबिस, फेरोजन स्टार्क व सारस की प्रजातियां शामिल हैं।