मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव और अक्षय यादव
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इस लोकसभा चुनाव में सपा का बंटाधार होने की कई वजह सामने आ रही हैं। बसपा का वोट सपा के साथ न जुड़ पाना तो एक कारण है ही। दूसरी बड़ी वजह सैफई परिवार का बिखराव भी मानी जा रही है, जिसके कारण यादव वोट में सेंध लग गई।
सैफई परिवार के रिश्तेदार भी एकजुट नजर नहीं आए। इससे गलत संदेश गया। इसका असर इससे पता चलता है कि जहां सैफई परिवार के उम्मीदवार थे, वहां पहले से कम वोट मिले हैं। अन्य जगहों पर हार भले ही मिली हो, पर वोट पहले से ज्यादा हैं।
गठबंधन में ब्रज की छह सीटों में से तीन सपा के पास थीं, एटा, फिरोजाबाद और मैनपुरी। दो बसपा के आगरा और फिरोजाबाद। एक रालोद के पास मथुरा। फिरोजाबाद में सैफई परिवार के कई रिश्तेदार अक्षय यादव के खिलाफ काम कर रहे थे। मैनपुरी में जो रिश्तेदार पहले सक्रिय रहते थे, उनमें से कई इस बार घर बैठे रहे। नतीजा सामने है।
फिरोजाबाद से रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव लड़े और मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव। दोनों जगह वोट 2014 से पहले कम मिले। मुलायम जीत तो गए लेकिन जीत का अंतर पहले से छोटा रहा। अक्षय तो हार ही गए। फिरोजाबाद में तो साफ ही दिख रहा है कि चाचा शिवपाल यादव ने जो वोट काटे, उनसे ही भतीजे अक्षय यादव की साइकिल पंक्चर हो गई।