ग्राम जाजऊ के नरेश हत्याकांड मामले में कुशवाहा समाज के लोगों को फंसाने के विरोध में कुशवाहा महासभा की ओर से नगला छारी में बुलायी गई महापंचायत को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौजूद रहीं। बाद में महासभा ने अपनी रणनीति बदलते हुए गांवों में नुक्कड़ सभाएं की।
बता दें कि एक दिसंबर को जाजऊ में मतदान के बाद नरेश कुशवाहा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुशवाहा समाज के चार लोगों समेत कुल सात के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस इनमें से चार को जेल भेज चुकी है। पिछले दिनों जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान कुशवाहा महासभा के जिलाध्यक्ष प्रेमचंद्र कुशवाहा ने पुलिस पर समाज के लोगों को झूठा फंसाने का आरोप लगाया था। तब पुलिस ने उन पर मुकदमा दर्ज किया था। इसी के चलते जिलाध्यक्ष प्रेमचंद्र कुशवाहा ने 30 दिसंबर को पुलिस प्रशासन के खिलाफ महापंचायत बुलाई थी। महापंचायत को रोकने के लिए उपजिलाधिकारी एमपी सिंह सुबह से ही क्षेत्राधिकारी एनके चौधरी, पुलिस और पीएसी के साथ आयोजन स्थल पर पहुंच गए। महापंचायत की प्रशासन से अनुमति न होने की बात कहकर उन्हें रोक दिया गया। जिलाध्यक्ष प्रेमसिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने समाज के लोगों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। बाद में उन्होंने गांवों में जाकर नुक्कड़ सभाएं की और आगे की रणनीति बनाते हुए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी। इस दौरान जितेंद्र प्रधान, मनोज कुशवाहा, पुरुषोत्तम, भानू, अशोक, अजय कठेरिया आदि मौजूद रहे।