सोरोंजी। मार्गशीर्ष अमृत कुंभ के अंतिम स्नान पर्व पूर्णिमा स्नान का पुण्य अर्जित करने के बाद नागा साधु संत व सन्यासी अपने मूल आश्रमों व डेरों की ओर लौटने लगे हैं। अब संतों का अगला समागम प्रयागराज में होगा। जहां मकर संक्रांति 14 जनवरी से माघ पूर्णिमा 5 फरवरी तक मेला चलेगा।
तीर्थंनगरी में दर्जन भर संत आश्रमों के अलावा हरि की पौड़ी किनारे डेरे तंबू डालकर बड़ी संख्या में संत रुके हुए थे। मार्गशीर्ष अमृत कुंभ के चलते कस्बे में धार्मिक बयार बह रही थी। सुबह से ही हरिनाम संकीर्तन और प्रभु के भजनों से तीर्थनगरी के आश्रम और मार्ग भक्तिमय वातावरण का एहसास कराते थे। अब पूर्णिमा स्नान के बाद साधु - संतो ने अपने डेरों की ओर रुख कर लिया है। तीर्थनगरी में संतों ने एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा स्नानों व पंचकोसी परिक्रमा में भाग लिया और जगह-जगह चल रहे अन्न क्षेत्रों में प्रसाद ग्रहण किया। आठ दिसंबर पूर्णिमा को अन्न क्षेत्र के अंतिम दिन अन्न क्षेत्र संचालकों ने साधु संतों को लोई, कंबल, मफलर, टोपे, मौजे आदि वितरित कर अगले वर्ष के मार्गशीर्ष अमृत कुंभ के लिए आमंत्रित किया। इस बार संत हरिद्वार, रामघाट, फर्रुखाबाद, आगरा, बदायूं, उत्तराखंड के अन्य स्थानों, दिल्ली, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, अलीगढ़, आदि दूरस्थ जनपदों से पधारे। शिकोहाबाद के बटेश्वर से पधारे संत सतीशानंद व ब्रिजेश्वरानंद पूर्णिमा स्नान के बाद अपने स्थानों को पैदल ही चले।