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Agra: रोक के बाद भी हाउस टैक्स सर्वे, सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी डराकर कर रहे वसूली

Wed, 14 Dec 2022 02:46 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

नगर निगम सदन ने गत माह ही सर्वे रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, लेकिन सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी सर्वे के नाम पर अब भी लोगों के घरों में पूछताछ कर रहे हैं। वसूली करने का भी आरोप है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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आगरा में हाउस टैक्स के डेढ़ लाख से ज्यादा नोटिस नगर निगम सदन ने अक्तूबर में ही निरस्त कर दिए थे। सर्वे रिपोर्ट भी खारिज कर दी लेकिन शहर में सर्वे करने वाली कंपनी (सांई कंस्ट्रक्शन) के सर्वेयर निगम सदन की रोक के बाद भी कॉलोनियों और मोहल्लों में घूमकर सर्वे रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

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आवास विकास कॉलोनी, शाहगंज, सिकंदरा बोदला क्षेत्र की कॉलोनियों में पहुंचकर कंपनी के कर्मचारी लोगों से सवाल पूछ रहे हैं। मांगने पर वह जो पहचानपत्र दिखाते हैं वे दो साल पुराने हैं। शिकायतें यह भी हैं कि सर्वे के नाम पर हजारों रुपये का टैक्स बताकर लोगों को ठगा जा रहा है। अपर नगर आयुक्त और टैक्स इंस्पेक्टरों को इस बारे में बताए जाने के बाद भी सर्वे करने वाली कंपनी पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

10 हजार लोगों ने जमा किया टैक्स

नगर निगम क्षेत्र में जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित सर्वे के लिए सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी को जिम्मेदारी दी गई। गृहकर के लिए सेटेलाइट की मदद से संपत्ति की माप और सड़क की चौड़ाई को आधार बनाना था। लेकिन कंपनी ने आनन-फानन में नोटिस जारी करा दिए। 

छावनी क्षेत्र के विधायक डॉ. जीएस धर्मेश के ही एक मंजिला घर को चार मंजिला बताकर टैक्स का भारी भरकम नोटिस दे दिया गया। उन्होंने नगर निगम सदन के  12 अक्तूबर को हुए अधिवेशन में यह मुद्दा उठाया था। कंपनी ने मनमाने तरीके से जिन डेढ़ लाख लोगों को नोटिस दिए, उनमें से 10 हजार लोग टैक्स भी जमा कर चुके हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि गड़बड़ नोटिसों को तो निरस्त कर दिया गया लेकिन जमा की गई रकम को निगम समायोजित क्यों नहीं कर रहा।

नगर निगम सदन ने ये प्रस्ताव किया था पारित

सदन में मेयर नवीन जैन ने इस प्रस्ताव के संबंध में कहा था कि सांई कंपनी ने जो सर्वे किया है, वह पूरी तरह से दोषपूर्ण है। जल्दबाजी में किया गया है। लापरवाही की पराकाष्ठा इस सर्वे में झलक रही है। इस सर्वे से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है। अब तक भेजे गए 1.50 लाख नोटिस तत्काल स्थगित किए जाते हैं। बाकी भवनों को अब नोटिस जारी न किए जाएं। सांई कंपनी द्वारा की गई पूरी सर्वे प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करता हूं। प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर शासन को भेजा गया है।

शासन से रोक नहीं लगी

नगर आयुक्त निखिल टी. फुंडे ने बताया कि सदन ने नोटिसों को स्थगित किया है और प्रक्रिया निरस्त करने की संस्तुति शासन को भेजी है। हमने कंपनी को जो जिम्मेदारी दी है, वह उसके तहत सर्वे कर रही है। जब शासन से रोक लगा दी जाएगी तो सर्वे बंद करा दिया जाएगा।
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आंकड़े

  • 3.50 लाख संपत्तियां हैं नगर निगम सीमा में
  • 85 हजार ने ही दिया है बीते साल गृहकर
  • 1.50 लाख नोटिस गड़बड़ी के आरोप में निरस्त
  • 10 हजार लोग गड़बड़ नोटिस की राशि जमा कर चुके

अधिकारियों के लिए वसूली

पार्षद राहुल चौधरी ने कहा कि सांई कंपनी के कर्मचारी खुलेआम गुंडई कर रहे हैं। जब सदन ने सर्वे निरस्त कर दिया और नोटिस खारिज कर दिए तो क्षेत्र में क्यों घूम रहे हैं। ये अधिकारियों के लिए वसूली का काम कर रहे हैं, इसलिए अफसर रोकते नहीं।

कर्मचारियों को रोका जाए

पार्षद सुषमा जैन ने कहा कि कंपनी ने टैक्स के नोटिस बेहद गड़बड़ी करके भेजे थे। एक बार जब तय हो गया कि कंपनी ने मनमाने तरीके से सर्वे किया है तो अब सर्वे की जरूरत क्या है। जो कर्मचारी घूम रहे हैं, उन्हें रोका जाए।

दो साल पुराना कार्ड, गलत सवाल पूछे

सेक्टर चार निवासी दिलीप शर्मा ने कहा कि सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी सर्वे के लिए आए थे। दो साल पुराना आई कार्ड उनके पास था। पहचानपत्र में जो हस्ताक्षर थे, वह अधिकारी यहां से जा चुके। ऐसे सवाल पूछ रहे हैं, जिसका हाउस टैक्स से कोई लेना-देना नहीं। घर में कितने लोग, कब से रहते हैं, इसका टैक्स से क्या लेना-देना।
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